दिल्ली: बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने भारत में चुनावी जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने नई दिल्ली में प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
नाहिद इस्लाम ने अपने बयान में कहा कि उनकी पार्टी भारत के उन युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है, जो चुनावी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने नई दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों, आयोजकों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की घटनाओं का उल्लेख किया। साथ ही जंतर-मंतर पर लगाए गए प्रतिबंधों और इंटरनेट सेवाओं के कथित निलंबन को लेकर भी सवाल उठाए।
नाहिद इस्लाम ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां मौलिक स्वतंत्रताओं के लिए सीधा खतरा पैदा करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी चिंताएं व्यक्त करने और संस्थाओं से जवाब मांगने का अधिकार होना चाहिए।
एनसीपी संयोजक ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, चुनावी व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब स्पष्ट तथ्यों और जवाबदेही के माध्यम से दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनावी अखंडता और संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर व्यक्त की जा रही चिंताओं का समाधान अवरोधक लगाकर या सेंसरशिप के माध्यम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए पारदर्शी जवाब आवश्यक हैं। नाहिद इस्लाम का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब नई दिल्ली में चुनावी जवाबदेही से जुड़े प्रदर्शनों और उन पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही है।
दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। हालांकि, चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता रहा है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी।

नाहिद इस्लाम ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई, उनकी स्थिति की जानकारी सार्वजनिक करने और पत्रकारों को बिना डर के काम करने देने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और नागरिक अधिकारों की रक्षा दोनों देशों के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
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