गोरखा। नेपाल के गोरखा जिले में शनिवार रात पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर बूढ़ीगंडकी नदी में गिरने से नदी का प्रवाह बाधित हो गया। यह घटना चुमनुब्री गांवपालिका-6 स्थित चुम्के खोला क्षेत्र की है। पहाड़ से भारी मात्रा में पत्थर और मलबा गिरने के कारण नदी का पानी रुकने लगा। इसके बाद नदी में जमा पानी का दबाव लगातार बढ़ता गया। रविवार सुबह करीब 4:30 बजे पानी का दबाव अधिक होने पर पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर बिखर गया और नदी के पानी के साथ गाद, पत्थर तथा मलबा नीचे की ओर बहने लगा। घटना के दौरान तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग नींद से जाग गए, लेकिन अंधेरा होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

गांवपालिका प्रशासन के अनुसार, भूस्खलन का मलबा करीब 150 मीटर तक फैला हुआ है। पहाड़ से लगातार मलबा गिरने के कारण बूढ़ीगंडकी नदी का प्रवाह बार-बार बाधित हो रहा है। नदी में पानी रुकने और फिर अचानक बहने का सिलसिला जारी है। इस दौरान नदी में बड़े-बड़े पत्थर भी बहते दिखाई दे रहे हैं।

शनिवार रात अचानक टूटा पहाड़

गोरखा जिले के चुमनुब्री गांवपालिका-6 स्थित चुम्के खोला में शनिवार की रात पहाड़ का हिस्सा टूटकर बूढ़ीगंडकी नदी में गिर गया।

पहाड़ से गिरे पत्थरों और मलबे के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया।

नदी के रास्ते में मलबा जमा होने से पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

इसके चलते नदी में पानी एकत्र होने लगा और उसका दबाव बढ़ता गया।

घटना के समय अंधेरा होने के कारण आसपास के लोगों को पहाड़ टूटने और नदी में मलबा गिरने की पूरी स्थिति समझने में परेशानी हुई।

हालांकि, घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या जानमाल के नुकसान की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।

नदी में जमा होने लगा पानी

पहाड़ का मलबा बूढ़ीगंडकी नदी में गिरने के बाद नदी का बहाव रुक गया।

प्राकृतिक जलधारा बाधित होने से पानी एक स्थान पर जमा होने लगा।

समय बीतने के साथ जमा पानी का दबाव बढ़ता गया।

इसके बाद मलबे के बीच से पानी का रिसाव भी तेज होने लगा।

नदी में पानी का दबाव बढ़ने और रिसाव तेज होने की स्थिति के बीच पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर बिखर गया।

इससे नदी के पानी के साथ गाद और पत्थर नीचे की ओर बहने लगे।

सुबह 4:30 बजे बढ़ा पानी का दबाव

जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 4:30 बजे नदी में जमा पानी का दबाव अधिक हो गया।

इस दौरान पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर बिखर गया।

इसके बाद पानी के साथ बड़ी मात्रा में गाद और मलबा नीचे की ओर बहने लगा।

नदी में जमा पत्थरों और मलबे के बीच से पानी निकलने के कारण बहाव की स्थिति में बदलाव आया।

घटना के दौरान तेज आवाज भी सुनाई दी।

आवाज सुनकर आसपास के लोग जाग गए, लेकिन अंधेरे के कारण वे तत्काल पूरी स्थिति नहीं समझ सके।

तेज आवाज सुनकर जागे लोग

शनिवार रात से रविवार सुबह के बीच हुई इस घटना के दौरान पहाड़ टूटने और मलबा बहने की आवाज आसपास के लोगों तक पहुंची।

तेज आवाज सुनकर लोग नींद से जाग गए।

हालांकि, उस समय अंधेरा होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पहाड़ का कितना हिस्सा टूटा है और नदी में कितनी मात्रा में मलबा गिरा है।

सुबह होने पर नदी में मलबे और बड़े पत्थरों के बहने की स्थिति सामने आई।

घटना के बाद बूढ़ीगंडकी नदी का प्रवाह बाधित होने और दोबारा खुलने का सिलसिला जारी रहने की जानकारी मिली।

करीब 150 मीटर तक फैला मलबा

चुमनुब्री गांवपालिका प्रशासन के अनुसार, पहाड़ से गिरे मलबे का फैलाव करीब 150 मीटर तक है।

मलबे में पत्थर और पहाड़ी सामग्री शामिल है, जो नदी के प्रवाह को बाधित कर रही है।

इससे बूढ़ीगंडकी नदी का पानी सामान्य तरीके से नहीं बह पा रहा है।

पहाड़ से मलबा गिरने के कारण नदी का रास्ता रुकता है और पानी का दबाव बढ़ने पर फिर खुल जाता है।

यह प्रक्रिया लगातार जारी रहने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, नदी में जमा मलबे की कुल मात्रा और उसकी ऊंचाई का विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

नदी में बह रहे बड़े-बड़े पत्थर

भूस्खलन के बाद बूढ़ीगंडकी नदी में बड़े-बड़े पत्थर बहते दिखाई दे रहे हैं।

पहाड़ से गिरे मलबे के साथ पत्थरों का नदी में पहुंचना प्रवाह में आए बदलाव को दर्शाता है।

नदी में पानी के साथ गाद और मलबा नीचे की ओर बह रहा है।

इससे नदी के बहाव की स्थिति लगातार बदल रही है।

पहाड़ से और मलबा गिरने पर पानी का रास्ता फिर बाधित हो रहा है।

गांवपालिका प्रशासन ने नदी का प्रवाह रुकने और खुलने की स्थिति जारी रहने की जानकारी दी है।

हालांकि, नीचे की ओर बह रहे मलबे से किसी बस्ती या संरचना को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है।

बार-बार रुक रहा नदी का प्रवाह

बूढ़ीगंडकी नदी में भूस्खलन का मलबा गिरने के बाद जलप्रवाह सामान्य नहीं हो पाया है।

नदी का रास्ता मलबे से बाधित होने पर पानी जमा हो रहा है।

जब पानी का दबाव बढ़ता है, तो मलबे के बीच से पानी निकलने लगता है।

इसके बाद नदी में पानी के साथ गाद और पत्थर बहने लगते हैं।

इस तरह नदी का प्रवाह रुकने और फिर खुलने का सिलसिला जारी है।

ऐसी स्थिति में नदी के जलस्तर और बहाव में अचानक बदलाव की आशंका बनी रहती है।

हालांकि, वर्तमान जलस्तर या पानी के बहाव की गति का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

पहाड़ी क्षेत्र में बनी अस्थिर स्थिति

चुम्के खोला क्षेत्र में पहाड़ का हिस्सा टूटने के बाद नदी और आसपास की भौगोलिक स्थिति प्रभावित हुई है।

मलबा करीब 150 मीटर तक फैला होने के कारण नदी के प्रवाह में बाधा आ रही है।

पहाड़ से लगातार मलबा गिरने की जानकारी भी सामने आई है।

ऐसी परिस्थितियों में नदी के बहाव की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होता है।

विशेष रूप से पानी जमा होने और फिर अचानक निकलने की प्रक्रिया से नदी के निचले हिस्सों में बहाव बदल सकता है।

हालांकि, स्थानीय प्रशासन की ओर से किसी विशेष चेतावनी, निकासी आदेश या राहत अभियान की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

प्रशासन ने दी भूस्खलन की जानकारी

चुमनुब्री गांवपालिका प्रशासन ने घटना के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि भूस्खलन का मलबा करीब 150 मीटर तक फैला हुआ है।

प्रशासन के अनुसार, पहाड़ से मलबा गिरने के कारण बूढ़ीगंडकी नदी का प्रवाह रुकने और खुलने का सिलसिला जारी है।

नदी में बड़े-बड़े पत्थर भी बह रहे हैं।

शनिवार रात शुरू हुई घटना के बाद रविवार सुबह करीब 4:30 बजे पानी का दबाव बढ़ने पर पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर बिखर गया था।

इसके बाद पानी के साथ गाद और मलबा नीचे की ओर बहने लगा।

बूढ़ीगंडकी नदी के बहाव पर नजर

गोरखा जिले के चुमनुब्री गांवपालिका-6 स्थित चुम्के खोला में हुई इस घटना के बाद बूढ़ीगंडकी नदी के प्रवाह में लगातार बदलाव हो रहा है।

पहाड़ का हिस्सा टूटकर नदी में गिरने से पानी का रास्ता बाधित हुआ था।

इसके बाद जमा पानी का दबाव बढ़ने पर मलबा टूटकर बहने लगा।

गांवपालिका प्रशासन के अनुसार, करीब 150 मीटर तक मलबा फैला हुआ है और नदी का प्रवाह बार-बार रुकने तथा खुलने की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। नदी में बड़े पत्थरों और गाद के बहाव के बीच स्थिति पर निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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