Jaipur. जयपुर। राजस्थान के निकाय चुनावों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और भाजपा नेता अरुण चतुर्वेदी ने गहलोत के हालिया आरोपों पर पलटवार करते हुए दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री की नाराजगी उनकी अपनी पार्टी में घटते प्रभाव से जुड़ी है। चतुर्वेदी ने कहा कि अब दिल्ली में भी उनकी बात नहीं सुनी जा रही और कांग्रेस के भीतर उनकी आवाज का असर कम हुआ है। यह चतुर्वेदी का राजनीतिक दावा है; कांग्रेस में गहलोत के वास्तविक प्रभाव को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
यह विवाद राजस्थान के हालिया शहरी स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद महापौर तथा निकाय प्रमुखों के चुनाव को लेकर चल रहा है। गहलोत ने भाजपा सरकार पर पुलिस, प्रशासन और धनबल का इस्तेमाल कर निर्वाचित पार्षदों को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ पार्षदों को पाला बदलने के लिए दो करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई और कांग्रेस पार्षदों पर प्रशासनिक दबाव बनाया गया। भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है।
इन्हीं आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुण चतुर्वेदी ने गहलोत पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान और उनकी हताशा... उनकी अपनी पार्टी में उनका प्रभाव समाप्त हो गया है, क्योंकि अब दिल्ली भी उनकी नहीं सुनती और कांग्रेस ने भी उनकी आवाज सुनना बंद कर दिया है।” चतुर्वेदी की टिप्पणी को गहलोत के आरोपों के राजनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
निकाय चुनावों के बाद बोर्ड गठन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच विवाद बढ़ा है। घोषित परिणामों के बाद सात नगर निगमों में हुए महापौर चुनावों में भाजपा ने छह पद जीते, जबकि कांग्रेस को एक पद मिला। अजमेर और पाली जैसे निगमों में कांग्रेस के पास भाजपा से अधिक पार्षद होने के बावजूद महापौर पद भाजपा के खाते में गया।
गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाया गया। उन्होंने पुलिस और सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग की बात भी कही। राजस्थान भाजपा के नेताओं ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि पार्षद अपनी पसंद के अनुसार मतदान करने के लिए स्वतंत्र थे।
गहलोत इससे पहले कांग्रेस की अपनी चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भाजपा के आक्रामक प्रचार और मुख्यमंत्री के रोड शो के जवाब में कांग्रेस की ओर से बेहतर योजना बनाई जाती तो पार्टी ज्यादा सीटें जीत सकती थी। राजस्थान में निकाय चुनाव खत्म होने के बाद भी राजनीतिक टकराव जारी है। एक तरफ कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया और बोर्ड गठन को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा नेता इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस और उसके वरिष्ठ नेताओं पर जवाबी हमला कर रहे हैं।