OBC आरक्षण पर राहुल गांधी की मोहन यादव से अपील 13 फीसदी पदों पर दें नियुक्ति
भोपाल। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े विवाद को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से हस्तक्षेप की अपील की है। राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27 प्रतिशत OBC आरक्षण में शामिल अतिरिक्त 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां लंबे समय से रुकी हुई हैं। उन्होंने राज्य सरकार से इस मामले का समाधान निकालकर चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की मांग की।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह मुद्दा उठाते हुए इंदौर में 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का जिक्र किया। इस कार्यक्रम में युवाओं ने सरकारी भर्ती, परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक और OBC आरक्षण से संबंधित अपनी समस्याएं उनके सामने रखी थीं। कार्यक्रम के दौरान एक अभ्यर्थी ने बताया था कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 13 प्रतिशत पद कानूनी विवाद के कारण रुके हुए हैं।राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री मोहन यादव से 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और चयनित उम्मीदवारों की नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की अपील की। उनका कहना है कि युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों लगाए हैं और चयन होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलने से वे अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का विवाद 2019 में राज्य सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों में OBC आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने से जुड़ा है। इस बदलाव की संवैधानिक वैधता को विभिन्न याचिकाओं के जरिए अदालतों में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 2026 के आदेश के मुताबिक 1994 के राज्य कानून में OBC के लिए 14 प्रतिशत, अनुसूचित जाति के लिए 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था; बाद के संशोधन के जरिए OBC कोटा बढ़ाया गया और उससे जुड़े मामले न्यायिक विचाराधीन हैंइसी कानूनी विवाद की वजह से कई भर्ती प्रक्रियाओं में 14 प्रतिशत OBC आरक्षण के तहत नियुक्तियां आगे बढ़ीं, जबकि अतिरिक्त 13 प्रतिशत पदों को लेकर अंतिम परिणाम या नियुक्तियों पर असर पड़ा। अलग-अलग भर्ती मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए सभी लंबित पदों को एक ही स्थिति में नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के सामने भी मध्य प्रदेश के OBC आरक्षण से जुड़े कई मामले लंबित हैं। मार्च 2026 में अदालत के रिकॉर्ड में ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया जिनमें 2019 के संशोधन की संवैधानिक वैधता, 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने की मांग और पुलिस कांस्टेबल सहित विभिन्न भर्तियों में आरक्षण के अनुपात से जुड़े सवाल शामिल हैं।राहुल गांधी ने इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार से चयनित युवाओं की समस्या का समाधान निकालने को कहा है। कांग्रेस का कहना है कि कानूनी विवाद के कारण अभ्यर्थियों को वर्षों तक नियुक्तियों का इंतजार नहीं करना चाहिए और सरकार को कानून के दायरे में रास्ता तलाशना चाहिए।
इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में OBC आरक्षण के अलावा युवाओं ने अन्य भर्ती और शिक्षा संबंधी मुद्दे भी उठाए थे। इनमें भर्ती परीक्षाओं के परिणाम, कथित अनियमितताएं, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों में देरी जैसे विषय शामिल थे। राहुल गांधी ने कार्यक्रम में छात्रों से सीधे संवाद किया और उनकी शिकायतें सुनीं।कार्यक्रम के बाद कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को मध्य प्रदेश के सभी जिलों तक ले जाने की घोषणा भी की। पार्टी इस अभियान के जरिए शिक्षा, रोजगार और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर युवाओं से संवाद करने की बात कह रही है।
वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी के आरोपों और दावों पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस नेता को शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषयों पर तथ्य और आंकड़ों के आधार पर बात करनी चाहिए। इस तरह छात्रों और भर्ती से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस और राज्य की भाजपा सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं।OBC आरक्षण का मुद्दा हालांकि केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध उन अभ्यर्थियों से है जिन्होंने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया और जिनके परिणाम या नियुक्तियां अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े न्यायिक विवाद से प्रभावित हुई हैं।
27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने का सवाल न्यायिक प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों में यह तय होना है कि बढ़े हुए आरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधान संवैधानिक कसौटी पर किस तरह लागू होंगे। इसलिए राज्य सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों को भी अदालत में चल रही कार्यवाही और उसके आदेशों के अनुरूप होना होगा।राहुल गांधी ने अपने बयान के जरिए विशेष रूप से उन उम्मीदवारों की स्थिति पर ध्यान दिलाया है जिनका दावा है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिली। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखने की अपील की है।
फिलहाल अतिरिक्त 13 प्रतिशत OBC आरक्षण से जुड़े पदों का मामला कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इससे जुड़े मामलों की सुनवाई के कारण अंतिम स्थिति न्यायिक फैसलों से भी प्रभावित होगी।मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का प्रश्न लंबे समय से राजनीतिक दलों, अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा का विषय है। अब राहुल गांधी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधे अपील किए जाने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है। आगे राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया पर चयनित अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।