नई दिल्ली: अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार को लेकर बड़ा समझौता किया है। डील के तहत तेल क्षेत्रों के विकास में 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश की बात कही गई है। इसी बीच अमेरिका भारत को भी वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति दे सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए कच्चे तेल की खरीद का नया रास्ता खुल सकता है।

65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका का कंट्रोल
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तेल को लेकर हुआ समझौता वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करने की दिशा में समझौता किया है। यह मात्रा इसलिए भी बड़ी है क्योंकि अमेरिका के पास अपने यहां करीब 46 अरब बैरल तेल भंडार बताया जाता है। भारत की जरूरत से तुलना करें तो देश हर साल लगभग 1.6 से 1.7 अरब बैरल कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस हिसाब से 65 अरब बैरल तेल भारत के करीब 40 साल के आयात के बराबर बैठता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस योजना को वेनेजुएला में काम करने वाली एक निजी कंपनी के साथ साझेदारी में आगे बढ़ाया जाएगा। इस साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन में अमेरिका को 55 प्रतिशत हिस्सा मिलने की बात कही गई है। हालांकि, अभी तक संबंधित निजी कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ट्रम्प ने बताया दुनिया की बड़ी डील
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इस समझौते को दुनिया की सबसे बड़ी डील बताया है। वहीं वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने भी इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है। वेनेजुएला के पास 300 अरब बैरल से ज्यादा का तेल भंडार है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार माना जाता है। ऐसे में 65 अरब बैरल का आंकड़ा उसके कुल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका को इन 65 अरब बैरल तेल का सीधे मालिकाना हक मिलेगा या फिर केवल उससे होने वाले उत्पादन में बड़ा हिस्सा मिलेगा, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 55 प्रतिशत हिस्सेदारी साझेदारी से होने वाले तेल उत्पादन से जुड़ी है। इसलिए 65 अरब बैरल पर अमेरिकी कंट्रोल का मतलब यह नहीं माना जा सकता कि पूरा तेल अमेरिका का हो गया है।
तेल क्षेत्रों के विकास में 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश
वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के मुताबिक, समझौते के तहत देश के 17 तेल क्षेत्रों को दोबारा विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में 100 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश किए जाने की बात कही गई है। वेनेजुएला सरकार को उम्मीद है कि इस निवेश और तेल उत्पादन बढ़ने से उसे आने वाले समय में करीब 209 अरब डॉलर टैक्स के रूप में प्राप्त हो सकते हैं। सरकार का उद्देश्य अपने विशाल तेल भंडार का बेहतर इस्तेमाल करके अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
वेनेजुएला के पास तेल की मात्रा बहुत ज्यादा होने के बावजूद उसका उत्पादन लंबे समय से अपनी क्षमता से काफी नीचे रहा है। आर्थिक संकट, निवेश की कमी, तेल उद्योग की कमजोर स्थिति और अमेरिकी प्रतिबंधों ने वहां के उत्पादन को प्रभावित किया है।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदले अमेरिका से रिश्ते
अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बड़ा बदलाव आया। इसके बाद डेल्सी रोड्रिग्ज के राष्ट्रपति बनने के साथ दोनों देशों के बीच बातचीत बढ़ी और तेल इस बातचीत का प्रमुख मुद्दा बन गया।
इसके बाद वेनेजुएला ने अपने तेल उद्योग से जुड़े नियमों में बदलाव किए। इन बदलावों के जरिए विदेशी कंपनियों को पहले की तुलना में अधिक अधिकार मिलने का रास्ता खुला। इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भी वेनेजुएला में निवेश और तेल उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं बनीं।
भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की मिल सकती है अनुमति
इसी घटनाक्रम के बीच भारत के लिए भी बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दे सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संभावना की जानकारी दी है। अगर भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति मिलती है तो भारतीय कंपनियों के लिए कच्चे तेल का एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध हो सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए स्रोतों से तेल खरीदने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ने दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ भी बातचीत की है। इसमें भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के लिए वेनेजुएला से तेल खरीदने की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
बढ़ा उत्पादन तो वैश्विक तेल बाजार पर पड़ेगा असर
वेनेजुएला का तेल उत्पादन अगर आने वाले समय में बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है। वेनेजुएला OPEC का सदस्य है और उत्पादन में बढ़ोतरी से वैश्विक बाजार में अतिरिक्त तेल की सप्लाई आ सकती है।
हालांकि, इससे तुरंत पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट तय नहीं है। तेल की कीमतों पर OPEC के फैसलों के अलावा वैश्विक मांग, दूसरे तेल उत्पादक देशों का उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।
इसलिए अमेरिका-वेनेजुएला समझौते और भारत को संभावित तेल खरीद की अनुमति को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, डील की पूरी शर्तें और भारत को मिलने वाली अनुमति स्पष्ट होने के बाद ही इसके वास्तविक असर की तस्वीर साफ होगी।
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