Shimla. शिमला। हिमाचल सरकार ने राज्य के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में ‘उपयोग’ यानी अर्बन प्लेटफार्म फॉर डिलीवरी ऑफ ऑनलाइन गवर्नेंस पोर्टल के माध्यम से नगर सेवाओं और वित्तीय प्रबंधन को अनिवार्य करने का फैसला किया है। शहरी विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार पहली अगस्त से सभी वित्तीय लेन-देन और लेखा-जोखा केवल उपयोग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही किए जाएंगे। सरकार ने यह निर्णय भारत सरकार के राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप लिया है।
इसका उद्देश्य नगर निकायों के वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाना है। अधिसूचना के अनुसार बजट निर्माण, बिल प्रसंस्करण, जनरल लेजर, रसीदें, परिसंपत्ति प्रबंधन, बैंक मिलान तथा अन्य सभी लेखा संबंधी कार्य राष्ट्रीय नगर लेखा पुस्तिका और हिमाचल प्रदेश नगर लेखा पुस्तिका-2025 के मानकों के अनुसार उपयोग पोर्टल पर किए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहली अगस्त से पुराने अभिलेख (लीगेसी डेटा) और सभी नए वित्तीय लेन-देन डिजिटल रूप से उपयोग प्लेटफॉर्म पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा संपत्ति कर, कूड़ा शुल्क, व्यापार लाइसेंस और अन्य नागरिक सेवाओं को भी उपयोग के लेखा मॉड्यूल से एकीकृत किया जाएगा, ताकि राजस्व का लेखा-जोखा पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी हो सके। अधिसूचना में नगर निगमों के आयुक्तों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के कार्यकारी अधिकारियों एवं सचिवों को उपयोग के 100 प्रतिशत उपयोग, समयबद्ध डाटा प्रविष्टि, ऑनलाइन राजस्व संग्रह और वित्तीय रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही संबंधित शहरी स्थानीय निकायों को पोर्टल को लाइव करने से पहले यूजर एक्सेप्टेंस टेस्टिंग प्रमाणपत्र शहरी विकास निदेशक को सौंपना होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपयोग पोर्टल से जारी होने वाले भुगतान बाउचर, रसीदें और वित्तीय रिपोर्टें ऑडिट के लिए अधिकृत एवं प्रमाणिक दस्तावेज मानी जाएंगी।