नई दिल्ली: यूक्रेन में रूसी मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले देवरिया के अभिषेक निषाद का शव 35 दिन बाद उनके पैतृक गांव करमेल पहुंचा। तिरंगे में लिपटे शव को देखकर पिता बेसुध हो गए, जबकि मां और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। अभिषेक परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी दो बहनों की शादी की जिम्मेदारी भी उसी पर थी।

35 दिन बाद घर पहुंचा अभिषेक का शव
देवरिया के गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमेल गांव निवासी 26 वर्षीय अभिषेक निषाद का पार्थिव शरीर 35 दिन के लंबे इंतजार के बाद सोमवार सुबह उनके घर पहुंचा। यूक्रेन से शव को हवाई जहाज के जरिए नई दिल्ली लाया गया था। इसके बाद तिरंगे में लपेटकर एंबुलेंस से देवरिया स्थित उनके गांव पहुंचाया गया।
सुबह करीब 6:30 बजे जैसे ही अभिषेक का शव घर पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई। बेटे का शव देखते ही पिता कौशल निषाद बेसुध हो गए। मां अनीता देवी भी बेटे को देखकर फूट-फूटकर रोने लगीं। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण अभिषेक के घर पहुंच गए। तिरंगे में लिपटे अभिषेक के शव की अंतिम यात्रा निकाली गई। इसके बाद शव को रुद्रपुर के बैकुंठ धाम ले जाया गया, जहां पिता कौशल निषाद ने कंपकंपाते हाथों से अपने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी।
पहली नौकरी के 39वें दिन चली गई जान
अभिषेक तुर्की की शिपिंग कंपनी के मालवाहक जहाज ‘गोल्डन लियो’ पर क्रू सदस्य यानी डेक कैडेट के रूप में काम करता था। उसने 10 जून 2026 को मुंबई की ओशियन ग्रेस शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से अपनी पहली नौकरी शुरू की थी। नौकरी के लिए वह वाराणसी से मुंबई पहुंचा था। इसके बाद 11 जून को स्पेन और तुर्किए के रास्ते जहाज पर सवार होकर यूक्रेन के लिए रवाना हुआ था। नौकरी शुरू हुए अभी करीब एक महीना ही हुआ था कि 19 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह के पास जहाज रूसी मिसाइल हमले की चपेट में आ गया।
हमले के समय अभिषेक जहाज के इंजन रूम में काम कर रहा था। मिसाइल हमले के बाद वह वहीं फंस गया और उसकी मौत हो गई। इस घटना में अभिषेक समेत चार भारतीय क्रू सदस्यों की मौत होने की जानकारी सामने आई थी।
डीएनए जांच के बाद हुई शव की पहचान
मिसाइल हमले के बाद शवों की पहचान में परेशानी हुई। इसी वजह से अभिषेक का शव भारत लाने में भी समय लगा। 20 जुलाई की शाम शिपिंग कंपनी के प्रतिनिधि ने अभिषेक के पिता कौशल निषाद को फोन कर बेटे की मौत की जानकारी दी थी।
इसके बाद परिवार ने प्रशासन और सरकार से शव भारत लाने में मदद की अपील की। 22 जुलाई को डीएम और एसपी अभिषेक के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। 23 जुलाई को बांसगांव सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने शव भारत लाने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। 24 जुलाई को विदेश मंत्रालय ने शव की पहचान के लिए डीएनए रिपोर्ट मांगी। इसके बाद पिता कौशल निषाद का ब्लड सैंपल लिया गया। 25 जुलाई को डीएनए रिपोर्ट विदेश मंत्रालय को भेजी गई। रिपोर्ट के मिलान के बाद अभिषेक के शव की पहचान सुनिश्चित हुई।
20 अगस्त को परिवार को विदेश मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई कि दो से तीन दिन में शव भारत पहुंच जाएगा। इसके बाद 23 अगस्त को अभिषेक का पार्थिव शरीर नई दिल्ली पहुंचा और वहां से एंबुलेंस के जरिए देवरिया लाया गया।
बहनों की शादी और घर का सपना अधूरा रह गया
अभिषेक अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी दो बहनें साधना और राधना हैं। परिवार के मुताबिक अभिषेक दोनों बहनों के भविष्य को लेकर चिंतित रहता था। वह बड़ी बहन साधना की शादी अच्छे घर में करना चाहता था और पिता से शादी की तैयारी शुरू करने की बात भी कही थी।
अभिषेक का सपना परिवार के लिए अपना घर बनवाने का भी था। परिवार को उम्मीद थी कि नौकरी के बाद वह धीरे-धीरे अपने सपनों को पूरा करेगा। लेकिन नौकरी शुरू करने के महज 39 दिन बाद उसकी मौत हो गई।
बहन बोली- अब किसकी कलाई पर राखी बांधूंगी
अभिषेक की छोटी बहन राधना भाई की मौत से पूरी तरह टूट गई। परिवार के मुताबिक, दोनों भाई-बहनों के बीच काफी गहरा लगाव था। भाई का शव सामने आने के बाद राधना लगातार रोती रही। जिस भाई के लौटने का परिवार इंतजार कर रहा था, वह 35 दिन बाद घर जरूर लौटा, लेकिन अंतिम विदाई के लिए। परिवार की उम्मीदें, बहनों की जिम्मेदारी और अपना घर बनाने का अभिषेक का सपना अधूरा ही रह गया।
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