मोदी-योगी के समर्थन की कीमत चुका रहा मुस्लिम युवक, लखनऊ में दिखी आस्था की अनोखी कहानी
पढ़े पूरी खबर...
New Delhi/Lucknow. नई दिल्ली/लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लखनऊ दौरे और अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ के उद्घाटन के अवसर पर एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने सियासत, समाज और आस्था के जटिल रिश्तों को उजागर कर दिया। मिर्जापुर निवासी मुस्लिम युवक तौकीर अहमद सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर लखनऊ पहुंचे, सिर्फ इसलिए कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी आंखों से देख सकें और खुलकर उनका समर्थन जता सकें।
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम स्थल पर तौकीर अहमद के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था, जिस पर पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं की तस्वीरें लगी थीं। यह दृश्य अपने आप में अलग था, क्योंकि राजनीतिक ध्रुवीकरण और साम्प्रदायिक बहसों के दौर में एक मुस्लिम युवक का इस तरह खुलकर मोदी-योगी के समर्थन में सामने आना लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया। तौकीर अहमद ने भावुक स्वर में बताया कि उनका मोदी और योगी सरकार के प्रति समर्थन उनके निजी जीवन पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “मैं मोदी-योगी को मानता हूं, इसलिए मेरी बेटी की शादी टूट रही है। एक बार नहीं, तीन-तीन बार रिश्ते टूट चुके हैं।” तौकीर की आंखें उस वक्त नम हो गईं, जब उन्होंने अपने समाज से मिलने वाली प्रताड़नाओं का जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि उनके समुदाय के कुछ लोग उन्हें दुत्कारते हैं और कहते हैं कि वह मुसलमान होकर हिंदू हो गया है। “लोग कहते हैं कि ये गाय का गोबर खाता है, गाय का मूत्र पीता है। तरह-तरह की बातें बनाकर मुझे अपमानित किया जाता है,” यह कहते हुए तौकीर खुद को संभालते नजर आए। उनका कहना है कि सामाजिक बहिष्कार और मानसिक दबाव के बावजूद वे अपने विचारों पर कायम हैं। तौकीर अहमद का कहना है कि वे मोदी और योगी सरकार के कामकाज से बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की खुलकर तारीफ की। तौकीर ने कहा, “पहले की सरकारों में पत्थरबाजी और दंगे आम बात थे, लेकिन योगी जी की सरकार आने के बाद शांति है। जो पत्थर चलाता है, योगी जी उसे तबाह कर देते हैं। इसलिए मैं कहता हूं कि सिंहासन पर भगवे भेष में शेर बैठा है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ करते हुए कहा कि मोदी और योगी दोनों ही सबके लिए सोचते हैं, किसी एक धर्म या वर्ग के लिए नहीं। तौकीर ने साफ कहा कि वे सनातन धर्म का सम्मान करते हैं, लेकिन साथ ही अपने इस्लाम धर्म को भी पूरी आस्था के साथ मानते हैं। “मेरी आस्था किसी के खिलाफ नहीं है, मैं सिर्फ अच्छे कामों का समर्थन करता हूं,” उन्होंने कहा। मिर्जापुर से लखनऊ आने का उद्देश्य बताते हुए तौकीर ने कहा कि यह यात्रा उनके लिए किसी राजनीतिक प्रदर्शन से ज्यादा आस्था का विषय है। “मैं मोदी और योगी के दर्शन करने आया हूं। मैं चाहता हूं कि उन्हें पता चले कि उनके कामों को सराहने वाले हर धर्म और समाज में हैं,” तौकीर ने कहा। यह घटना उस समय सामने आई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ में अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर ‘राष्ट्र प्रेरणा स्थल’ का उद्घाटन कर रहे थे।
जनसभा में मौजूद तौकीर जैसे समर्थक यह दिखाते हैं कि मोदी-योगी की लोकप्रियता केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह धार्मिक सीमाओं से परे जाकर लोगों को प्रभावित कर रही है। हालांकि, तौकीर अहमद की कहानी यह भी बताती है कि ऐसे समर्थन की कीमत चुकानी पड़ सकती है। सामाजिक बहिष्कार, पारिवारिक संकट और मानसिक तनाव उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। इसके बावजूद वे अपने फैसले पर अडिग हैं। तौकीर की कहानी इस बात का उदाहरण है कि राजनीतिक आस्था कितनी व्यक्तिगत हो सकती है और समाज में बदलाव की राह कितनी कठिन। यह कहानी न सिर्फ राजनीतिक विमर्श को नया कोण देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि लोकतंत्र में समर्थन और असहमति की कीमत हर किसी के लिए एक जैसी नहीं होती।