भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 9 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना पैनल से बाहर, जाने क्यों ?
Madhya Pradesh. मध्य प्रदेश | मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत कई जिलों के 9 निजी अस्पतालों को योजना के पैनल से बाहर कर दिया है। इस कदम के बाद इन अस्पतालों में अब आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा नहीं मिल सकेगी।
सरकारी जांच में सामने आया कि इन निजी अस्पतालों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और अनुबंध की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया था। कई अस्पतालों की कार्यप्रणाली में अनियमितताएं पाई गईं और नियमों का पालन सही तरीके से नहीं किया जा रहा था। इसी आधार पर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने यह सख्त कदम उठाया।
जानकारी के अनुसार, कार्रवाई करने से पहले संबंधित सभी अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया था और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया। सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन से संतोषजनक जवाब और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए, लेकिन अधिकांश अस्पताल अपने बचाव में ठोस प्रमाण या स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने अंतिम निर्णय लेते हुए इन्हें योजना से डी-एम्पैनल कर दिया।
इस कार्रवाई में सबसे अधिक अस्पताल राजधानी भोपाल से जुड़े हैं, जहां तीन निजी अस्पतालों को सूची से बाहर किया गया है। इसके अलावा इंदौर, ग्वालियर, नीमच, गुना, खरगोन और मंडला जिलों में भी एक-एक अस्पताल पर कार्रवाई की गई है। इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने स्वयं अपनी जनरल मेडिसिन सेवाओं को आयुष्मान योजना से बाहर करने का निर्णय लिया है।
आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत प्रदेश में लाखों गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। ऐसे में अस्पतालों द्वारा नियमों का उल्लंघन गंभीर मामला माना गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि योजना के तहत जुड़े सभी निजी अस्पतालों को अनुबंध की शर्तों और SOP का पालन करना अनिवार्य है, और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन मरीजों का इलाज पहले से इन अस्पतालों में चल रहा है, उन्हें पूरी चिकित्सा सुविधा मिलती रहेगी ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। लेकिन नए मरीजों को अब इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत भर्ती नहीं किया जाएगा।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के कार्यपालन अधिकारी भव्या त्रिपाठी ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी जांच और नियमों के अनुसार की गई है। उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों को सुनवाई का अवसर दिया गया था, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर यह निर्णय लेना पड़ा।