चुनाव आयोग के 9 फैसले: SIR पर मतभेद के बीच एजेंडा और रिकॉर्ड से लेकर IT सिस्टम की समीक्षा तक
नई दिल्ली: चुनाव आयोग के भीतर Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सामने आए मतभेदों के बीच शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने अपने कामकाज और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े 9 फैसलों की जानकारी दी। आयोग ने कहा कि आगे बैठकों से पहले एजेंडा साझा किया जाएगा और बैठक के बाद फैसलों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जाएगा।
यह बैठक उस रिपोर्ट के बाद हुई जिसमें दावा किया गया था कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन आपत्तियों में मतदाता सूची, Form-6, IT सिस्टम और अधिकारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
आयोग ने SIR के फैसलों को बताया सर्वसम्मत
बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े फैसले तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, सामने आई आपत्तियां मुख्य रूप से प्रक्रिया और काम के बंटवारे से संबंधित थीं और उन्हें आयोग की सामान्य विचार-विमर्श प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों के काम के पुनर्वितरण को लेकर सवाल उठे थे, उनके आदेश लागू नहीं किए गए। आयोग के मुताबिक चुनाव आयुक्तों द्वारा अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पालन किया जाएगा।
IT सिस्टम की जांच के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति
चुनाव आयोग ने ECI-NET और उससे जुड़े IT सिस्टम की समीक्षा का भी फैसला लिया है। इसके लिए एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। इसमें IIT या IIIT से जुड़े एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल की रिपोर्ट में दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और IT सिस्टम के केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए जाने की बात कही गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने यह चिंता भी जताई थी कि राज्य स्तर के वैधानिक अधिकारियों की पहुंच सीमित नहीं होनी चाहिए।
SIR में नाम छूटा तो दोबारा आवेदन का मौका
आयोग ने कहा कि SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जिन पात्र लोगों के नाम शामिल नहीं हो पाए हैं, वे मौजूदा मतदाता सूची अपडेट प्रक्रिया के तहत संबंधित Electoral Registration Officer यानी ERO के पास आवेदन कर सकते हैं।
आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और ERO को पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसमें पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को भी शामिल किया गया है।
हाल की रिपोर्ट के अनुसार, SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से ज्यादा नाम कम हुए हैं।
Form-6 और बंगाल के मामलों पर सवाल बरकरार
आयोग के नए फैसलों के बावजूद कुछ मुद्दों पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। इनमें Form-6 में माता-पिता या पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ा सवाल शामिल है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी और इसे हटाने की मांग की गई थी।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े कुछ मामलों में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संधू ने यह जानना चाहा था कि इन अपीलों को दाखिल करने की अनुमति किसने दी थी और प्रक्रिया किसके निर्देश पर हुई।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, BJP ने आरोपों को बताया गलत
चुनाव आयोग के फैसलों के बाद कांग्रेस ने इसे अंदरूनी मतभेदों के सामने आने के बाद स्थिति संभालने की कोशिश बताया और SIR को लेकर सवाल उठाए। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई या उनके इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
दूसरी ओर, BJP ने चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कांग्रेस पर बिना आधार के आरोप लगाने की बात कही।
फिलहाल आयोग ने प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एजेंडा, बैठक रिकॉर्ड और IT सिस्टम की समीक्षा जैसे कदम घोषित किए हैं। वहीं Form-6, पश्चिम बंगाल की अपील प्रक्रिया और कुछ IT फैसलों को लेकर उठे सवालों पर आगे की स्पष्टता का इंतजार है। इससे SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रही बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।