जलगांव। गणेश विसर्जन के अगले दिन शनिवार को मेहरून झील और आसपास के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया। करीब 1,500 वॉलंटियर्स ने इस अभियान में हिस्सा लेते हुए इलाके से लगभग 95 टन ‘निर्मल्य’ यानी पूजा-पाठ के बाद बची सामग्री एकत्र करने में मदद की। सार्वजनिक गणेश मंडलों और घरों की 50 हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद झील और गणेश घाट क्षेत्र की सफाई के लिए यह अभियान चलाया गया।

गणेशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मेहरून झील सहित शहर के अलग-अलग विसर्जन स्थलों पर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया था। विसर्जन के बाद फूल, मालाएं और पूजा में इस्तेमाल की गई अन्य सामग्री बड़ी मात्रा में घाटों और आसपास के क्षेत्रों में जमा हो गई थी। इसे हटाने के लिए अगले ही दिन व्यापक सफाई अभियान शुरू किया गया।

इस अभियान की सबसे खास बात बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स की भागीदारी रही। करीब 1,500 लोगों ने सफाई अभियान में योगदान दिया। इनमें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थी और सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता शामिल रहे। सभी ने मिलकर विसर्जन के बाद जमा हुई पूजा सामग्री को एकत्र किया और क्षेत्र की सफाई में सहयोग किया।

सफाई अभियान में G.H. रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट और अनुभूति स्कूल के छात्रों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने अलग-अलग स्थानों से निर्मल्य इकट्ठा करने और उसे निर्धारित जगह तक पहुंचाने में सहयोग किया। इसके अलावा डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में अभियान से जुड़े।

सामाजिक संगठनों, विद्यार्थियों और नगर निगम की संयुक्त भागीदारी के कारण कम समय में बड़ी मात्रा में निर्मल्य एकत्र किया जा सका। अभियान के दौरान लगभग 95 टन पूजा सामग्री को अलग-अलग क्षेत्रों से इकट्ठा किया गया। इतनी बड़ी मात्रा में निर्मल्य का एकत्र होना गणेश विसर्जन के बाद सफाई की आवश्यकता को भी दर्शाता है।

जलगांव म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने सफाई अभियान के लिए विशेष व्यवस्था की थी। शहर के अलग-अलग हिस्सों से निर्मल्य एकत्र करने के लिए कुल 25 गाड़ियां तैनात की गईं। इन वाहनों की मदद से विभिन्न स्थानों पर जमा पूजा सामग्री को हटाया गया।

नगर निगम की गाड़ियों को नेरी नाका, पांडे चौक, सिंधी कॉलोनी, मोहाडी रोड और मेहरून झील के गणेश घाट क्षेत्र सहित कई स्थानों पर लगाया गया था। इन इलाकों से वॉलंटियर्स और सफाई कर्मचारियों द्वारा एकत्र की गई सामग्री को वाहनों के माध्यम से हटाया गया।

मेहरून झील गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के प्रमुख स्थानों में शामिल रही। सार्वजनिक मंडलों के साथ बड़ी संख्या में घरों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का भी यहां विसर्जन किया गया। 50 हजार से ज्यादा प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद घाट और आसपास के इलाके में बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री जमा हो गई थी।

विसर्जन के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश को फूल, मालाएं और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करते हैं। विसर्जन के बाद बची हुई इस सामग्री को निर्मल्य कहा जाता है। यदि इसे समय पर नहीं हटाया जाए तो बड़ी मात्रा में जमा सामग्री से घाट और आसपास का क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। इसी कारण विसर्जन के तुरंत बाद सफाई अभियान चलाया गया।

शनिवार सुबह से ही वॉलंटियर्स सफाई कार्य में जुट गए। अलग-अलग समूह बनाकर मेहरून झील और आसपास के हिस्सों में सफाई की गई। जहां भी पूजा सामग्री जमा थी, उसे एकत्र कर नगर निगम के वाहनों तक पहुंचाया गया।

इस अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कॉलेज और स्कूल के छात्रों ने सफाई कार्य में हिस्सा लेकर सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने का संदेश दिया। उनके साथ डॉ. नानासाहेब धर्माधिकारी प्रतिष्ठान के कार्यकर्ताओं ने भी निर्मल्य एकत्र करने में सहयोग किया।

नगर निगम की ओर से 25 वाहनों की व्यवस्था किए जाने से एकत्र सामग्री को तेजी से हटाने में मदद मिली। अलग-अलग क्षेत्रों में वाहन तैनात होने के कारण वॉलंटियर्स को निर्मल्य के परिवहन में आसानी हुई। नेरी नाका से लेकर मेहरून झील के गणेश घाट तक कई स्थानों पर एक साथ अभियान चलाया गया।

गणेश विसर्जन के बाद इतनी बड़ी संख्या में लोगों के सफाई अभियान से जुड़ने से मेहरून झील क्षेत्र को साफ करने का काम तेजी से पूरा किया गया। करीब 1,500 वॉलंटियर्स ने सामूहिक रूप से 95 टन निर्मल्य इकट्ठा करने में सहयोग किया।

गणेशोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक भागीदारी का भी बड़ा आयोजन है। विसर्जन के बाद सार्वजनिक स्थानों की सफाई भी इस आयोजन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है। जलगांव में चलाए गए अभियान में प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की संयुक्त भागीदारी देखने को मिली।

विशेष रूप से 50 हजार से अधिक गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद सफाई की चुनौती काफी बड़ी थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण घाट और आसपास के इलाकों में निर्मल्य जमा हुआ था। इसके बावजूद करीब 1,500 वॉलंटियर्स और नगर निगम की व्यवस्था के जरिए बड़े स्तर पर सफाई की गई।

मेहरून झील के अलावा शहर के अन्य हिस्सों में भी निर्मल्य संग्रह की व्यवस्था की गई। नेरी नाका, पांडे चौक, सिंधी कॉलोनी और मोहाडी रोड जैसे क्षेत्रों से भी पूजा सामग्री एकत्र की गई। इससे सफाई अभियान केवल झील तक सीमित न रहकर शहर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचा।

गणेश विसर्जन के अगले दिन चलाए गए इस महाअभियान ने सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगर निगम की टीमों ने मिलकर 95 टन निर्मल्य एकत्र किया। सफाई अभियान के जरिए मेहरून झील और आसपास के क्षेत्रों को विसर्जन के बाद जमा पूजा सामग्री से साफ करने का प्रयास किया गया।

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