13 साइबर अपराधियों को दबोचा गया, ऐसे फंसाते, एक्शन में पुलिस
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सांकेतिक तस्वीर
रांची: झारखंड पुलिस ने धनबाद और देवघर जिलों में अलग-अलग ऑपरेशन में 13 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है. साथ ही अपराधियों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, नकदी व लोगों को ठगने में इस्तेमाल होने वाला दूसरा सामान भी बरामद किया है. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी.
अधिकारी ने बताया कि धनबाद में बैंक मोड़ पुलिस स्टेशन इलाके के एक होटल में देर रात छापेमारी के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया. धनबाद एसपी (सिटी) ऋत्विक श्रीवास्तव ने बताया कि 23 से 33 साल की उम्र के आरोपियों ने साइबर फ्रॉड करने की बात कबूल की है और तीनों राज्यों के अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं.
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान नोएडा, उत्तर प्रदेश के सूरज चौहान (29) और साहिल खान (28), रोहतास, बिहार के बिकू साव (26) और झारखंड के पिंटू कुमार मंडल (23) व बसंत कुमार मंडल (33) के रूप में हुई है. पुलिस ने 10 मोबाइल फोन, 16 अलग-अलग सिम, 38 एटीएम कार्ड, 6000 रुपये नकद, एक एसयूवी और फिंगरप्रिंट क्लोनिंग में इस्तेमाल होने वाली चीजें बरामद की हैं.
डीएसपी नौशाद आलम के नेतृत्व में एक स्पेशल टीम ने रविवार देर रात छापेमारी की और बैंक मोड़ पुलिस स्टेशन इलाके के एक होटल से आरोपियों को गिरफ्तार किया. देवघर में पुलिस ने आठ साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जो कस्टमर केयर ऑफिसर बनकर लोगों को कैशबैक ऑफर का लालच देकर ठगी कर रहे थे.
देवघर डीएसपी (साइबर) राजा कुमार मित्रा ने बताया कि साइबर पुलिस स्टेशन की एक टीम ने एक सूचना के आधार पर सारठ के पत्थरअड्डा चौकी के तहत टेतरिया जंगल में छापेमारी की और आरोपियों को गिरफ्तार किया.
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिलबर अंसारी, तनवीर अंसारी (दोनों सारठ), लुकमान अंसारी (सोनारायठाड़ी), जितेंद्र दास, साजन महरा, विष्णु महरा, उत्तम महरा और राजेश महरा ( पत्थरअड्डा) के रूप में हुई है.
पुलिस ने 9 मोबाइल फोन और 11 सिम कार्ड बरामद किए हैं. पुलिस के मुताबिक आरोपी पीएम किसान योजना के तहत ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और दूसरी योजनाओं का फायदा दिलाने का वादा करके ग्रामीणों को धोखा देते थे. वे कृषि विभाग और डिजिटल पेमेंट ऐप के अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें लिंक भेजते थे. फिर पीड़ितों से लिंक पर क्लिक करवाकर उन्हें धोखा देते थे.