बाढ़ से 10 जिले प्रभावित, सीएम ने राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की
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Patna. पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और राज्य की नदियों के जलस्तर की अद्यतन जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में बढ़ते जलस्तर को ध्यान में रखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहे और प्रभावित लोगों को यथाशीघ्र और संवेदनशील तरीके से सहायता प्रदान करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार में हमेशा आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए तत्परता रहती है। मानसून के पूर्व संभावित बाढ़, सुखाड़ और अन्य आपदाओं को लेकर तैयारियों की समीक्षा की जाती है और एसओपी के अनुसार सभी को निर्देश दिए जाते हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आनुग्रहिक राहत राशि जल्द से जल्द वितरण कराने तथा फसल क्षति के लिए किसानों के बीच राशि भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पथ निर्माण विभाग एवं ग्रामीण कार्य विभाग बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्स्थापन कार्य सुनिश्चित करें ताकि प्रभावित लोगों को आवागमन में कोई परेशानी न हो। बैठक में विकास आयुक्त सह आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य की अद्यतन स्थिति और नदियों के जलस्तर के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिक वर्षा के कारण गंगा नदी के किनारे स्थित 10 जिले—भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार—विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। इन जिलों के 54 प्रखंडों की 348 पंचायतों में लगभग 25 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। राहत एवं बचाव कार्य में एनडीआरएफ की सात टीमें और एसडीआरएफ की नौ टीमें सक्रिय हैं। इसके अलावा 60 मोटर बोट और 1233 नाव लगातार राहत कार्यों में लगी हुई हैं।
अब तक 52,573 पॉलीथीन शीट और 1800 सूखा राशन प्रभावित लोगों के बीच वितरित किए जा चुके हैं। बाढ़ राहत कैंपों में प्रभावित लोगों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। सामुदायिक रसोई केंद्रों में अब तक 13 लाख से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया है। पशुओं के लिए पशु चारा और चिकित्सा की सुविधा भी प्रदान की गई है। आपदा प्रबंधन विभाग प्रतिदिन राहत एवं बचाव कार्य की समीक्षा कर रहा है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बाढ़ प्रभावित लोगों को आनुग्रहिक राहत राशि वितरण करने के लिए जिलाधिकारियों को सूची बनाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को फसल क्षति के लिए मुआवजा समय पर मिले।
प्रत्यय अमृत ने बताया कि राज्य में अच्छी वर्षा के कारण किसानों को भी फायदा हुआ है और अब तक लगभग 93 प्रतिशत धान की रोपनी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राहत एवं बचाव कार्य के दौरान प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा, आवागमन और मूलभूत आवश्यकताओं को सुनिश्चित करना हो। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि प्रभावित क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर लगातार मॉनिटर किया जाए और किसी भी तरह की आपात स्थिति के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार रहे। उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को आवश्यक चेतावनी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए ताकि नुकसान को कम किया जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त संख्या में राहत कैंप, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग को हर स्तर पर सक्रिय रहकर प्रभावित लोगों को राहत पहुंचानी चाहिए।
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार सक्रिय रखी हैं। मोटर बोट और नावों के माध्यम से पानी में फंसे लोगों को बचाया जा रहा है। पॉलीथीन शीट और राशन वितरण के माध्यम से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहने की सुविधा दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि सड़क और पुल जैसे बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण तत्काल किया जाए ताकि आवागमन बाधित न हो। साथ ही उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित लोगों को राहत राशि का वितरण पारदर्शी तरीके से किया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
बिहार में बाढ़ की यह स्थिति राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिए कि राहत कार्य के दौरान बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा विशेष ध्यान में रखी जाए। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, सामुदायिक रसोई केंद्रों और पशु चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रभावित इलाकों में बाढ़ नियंत्रण और राहत कार्यों की पूरी तैयारी है। सभी टीमों को निर्देशित किया गया है कि वे हर समय सतर्क रहें और प्रभावित लोगों को तुरंत मदद उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों को आनुग्रहिक राहत राशि और फसल क्षति का मुआवजा समय पर मिले, इसके लिए जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को पूरी तरह सतर्क रहना होगा। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि राहत और बचाव कार्य में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए और सभी संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।