Protests: डिप्लोमैटिक परिसर के बाहर उपद्रव पर देश का कड़ा बयान
हाई कमीशन के बाहर घटना पर ढाका की नाराज़गी
Delhi दिल्ली: 20 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश हाई कमीशन के आवास के बाहर हुई घटना को लेकर बांग्लादेश ने कड़ा रुख अपनाया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को “अत्यंत खेदजनक” बताते हुए स्पष्ट किया है कि इसे किसी भी सूरत में “भ्रामक प्रचार” नहीं कहा जा सकता। मंत्रालय का कहना है कि जिस तरह से असामाजिक तत्वों को हाई कमीशन की परिधि के ठीक बाहर गतिविधियां करने की अनुमति दी गई, उससे परिसर के अंदर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में भय और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हुआ। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह घटना पूरी तरह संगठित प्रतीत होती है और इससे पहले हाई कमीशन को किसी भी प्रकार की अग्रिम सूचना नहीं दी गई थी। मंत्रालय ने सवाल उठाया कि इतनी संवेदनशील जगह के बाहर इस तरह की गतिविधियां कैसे होने दी गईं, जबकि राजनयिक परिसरों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय नियमों और परंपराओं के तहत मेजबान देश की जिम्मेदारी होती है।
बयान में यह भी कहा गया कि हाई कमीशन के बाहर हुई गतिविधियों के कारण परिसर के भीतर मौजूद राजनयिक और कर्मचारी असुरक्षित महसूस करने लगे थे। इसे केवल एक सामान्य घटना या गलतफहमी बताकर टालना उचित नहीं है। बांग्लादेश ने साफ तौर पर कहा है कि इस तरह की घटनाएं दोनों देशों के बीच स्थापित कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ हैं। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारत सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को भी संज्ञान में लिया है। मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार ने भारत में स्थित बांग्लादेश के सभी राजनयिक मिशनों और परिसरों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है। बांग्लादेश ने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी और राजनयिक परिसरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बयान केवल एक घटना पर प्रतिक्रिया भर नहीं है, बल्कि यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में राजनयिक मर्यादाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक स्पष्ट संदेश भी है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में किसी भी देश के दूतावास या उच्चायोग की सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा माना जाता है और इस पर किसी भी तरह की ढिलाई गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और अपेक्षा करता है कि भारत की संबंधित एजेंसियां घटना की परिस्थितियों की समीक्षा करेंगी। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में किसी भी राजनयिक मिशन के बाहर इस प्रकार की अव्यवस्था या असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न न हो। राजनयिक हलकों में इसे भारत और बांग्लादेश के बीच आपसी संवाद और विश्वास की कसौटी के रूप में देखा जा रहा है। बांग्लादेश का स्पष्ट संदेश है कि मित्रतापूर्ण संबंधों के बावजूद राजनयिक सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।