कोलकाता :आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला चिकित्सक के दुष्कर्म और हत्या के बाद शव का कथित रूप से जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने के मामले में गिरफ्तार पानीहाटी के पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक निर्मल घोष को शुक्रवार सुबह खड़दह थाने लाया गया। पुलिस जब उन्हें बैरकपुर महकमा अदालत में पेश करने के लिए थाने से बाहर निकाल रही थी, तभी वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। भीड़ ने उनके खिलाफ नारे लगाए और उन पर अंडे, जूते तथा गंदगी फेंकने का प्रयास किया।
पुलिसकर्मियों ने निर्मल घोष को सुरक्षा घेरे में थाने से बाहर निकालकर पुलिस वाहन तक पहुंचाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों के गुस्से को देखते हुए पूर्व विधायक को हेलमेट पहनाया गया था। इसके बावजूद उन्हें भीड़ के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। मौके पर कथित रूप से धक्का-मुक्की हुई और कुछ लोगों द्वारा थप्पड़ एवं लात मारने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से उन्हें भीड़ से निकालकर वाहन में बैठाया।
निर्मल घोष को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुवार को ओडिशा के बालेश्वर जिले के एक होटल से गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, आरजी कर अस्पताल की मृतक चिकित्सक के पिता की शिकायत पर खड़दह थाने में दर्ज नए मामले में उनका नाम शामिल है। यह मामला मुख्य दुष्कर्म और हत्या की वारदात से अलग, पीड़िता के शव के कथित तौर पर जबरन एवं जल्दबाजी में अंतिम संस्कार और साक्ष्य प्रभावित करने के आरोपों से संबंधित है।
पुलिस की कार्रवाई में संजीव मुखर्जी को भी गिरफ्तार किया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार संजीव पीड़ित परिवार के पड़ोसी बताए गए हैं, जबकि मामले में नामजद सोमनाथ दे पानीहाटी नगरपालिका से जुड़े पूर्व नगर प्रतिनिधि हैं। पुलिस सोमनाथ दे की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।की रिपोर्ट के अनुसार, नई प्राथमिकी में निर्मल घोष, सोमनाथ दे और संजीव मुखर्जी को नामजद किया गया है।
संजीव मुखर्जी को अदालत ले जाते समय भी खड़दह थाने के बाहर प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े समर्थकों ने उनके खिलाफ ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए। कुछ प्रदर्शनकारी जूतों की माला लेकर पहुंचे थे। विरोध स्थल पर डीजे बजाए जाने के कारण माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।
शुक्रवार को जब दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया चल रही थी, तब पीड़िता के पिता भी खड़दह थाने पहुंचे थे। उन्होंने वहां मौजूद मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। माना जा रहा है कि पुलिस जांच के दौरान उनका गोपनीय बयान दर्ज कराया जा सकता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें अलग से सुरक्षा उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।
नौ अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार हॉल से ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक का शव बरामद हुआ था। जांच में उसके साथ दुष्कर्म और हत्या की बात सामने आई थी। घटना के बाद डॉक्टरों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने देशभर में प्रदर्शन किए थे। पीड़ित परिवार ने शुरुआत से ही जांच और शव के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे।
मृतका के पिता का आरोप है कि परिवार की स्पष्ट सहमति के बिना शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराया गया। उनका दावा है कि ऐसा करने से दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने की संभावना समाप्त हो गई और महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हुए। उस समय निर्मल घोष पानीहाटी से विधायक थे। शिकायत में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान उनकी कथित भूमिका की जांच करने की मांग की गई है।
निर्मल घोष और अन्य नामजद लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक जांच के अधीन हैं। गिरफ्तारी को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। पुलिस का कहना है कि शिकायत, उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों के बयान और उस समय की परिस्थितियों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अदालत में आरोपियों की हिरासत और जांच से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई होगी।
पूर्व विधायक पर प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए हमले ने पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी आरोपी के खिलाफ जनता में नाराजगी होने के बावजूद उसे अदालत तक सुरक्षित पहुंचाना पुलिस की जिम्मेदारी है। मामले में अंतिम रूप से दोष या निर्दोषता का फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।
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