कोलकाता: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार सुबह पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया पर विद्यासागर को बंगाल नवजागरण के प्रमुख व्यक्तित्व, महान शिक्षाविद और समाज सुधारक के रूप में स्मरण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यासागर ने ‘वर्ण परिचय’ के माध्यम से बंगाली भाषा और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिला शिक्षा के प्रसार और विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में उनका संघर्ष सामाजिक सुधार के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 के लिए विद्यासागर ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।

उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ विद्यासागर के निर्भीक प्रयासों और उनकी मानवतावादी सोच को याद करते हुए कहा कि उनका ज्ञान, साहस और समाज के प्रति समर्पण आज भी प्रेरणा देता है।

पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर 1820 को तत्कालीन बंगाल के वीरसिंह गांव में हुआ था। संस्कृत कॉलेज में अध्ययन के दौरान उनकी विद्वता के कारण उन्हें ‘विद्यासागर’ की उपाधि मिली। उनका निधन 29 जुलाई 1891 को हुआ था।

विद्यासागर ने संस्कृत कॉलेज (कलकत्ता) में लंबे समय तक अध्ययन किया और बाद में इसी संस्थान के प्रधानाचार्य भी बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ बंगाली भाषा में सरल पाठ्यपुस्तकों के लेखन और प्रसार पर जोर दिया। समाज सुधार के साथ उनका योगदान शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यासागर के आदर्श और मानवीय मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहें, यही उनकी जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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