Kolkata कोलकाता:टोटो की हिंसा एक समस्या है। कभी रिक्शा के शहर के नाम से मशहूर सिलीगुड़ी में भारी ट्रैफिक जाम का एक मुख्य कारण टोटो बन गया है। आंकड़े बताते हैं कि उत्तर बंगाल के इस शहर में पंजीकृत टोटो की संख्या मात्र 4,000 है। इन टोटो को खास सड़कों पर चलाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, इनके अलावा, सिलीगुड़ी की सड़कों पर हर दिन करीब 7,000 और टोटो चलते हैं। इन्हें कोई मान्यता नहीं है। नतीजतन, ट्रैफिक जाम रोजाना का सिरदर्द बन गया है। कभी-कभी दुर्घटनाएं भी होती हैं। हाल ही में सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने विधानसभा सत्र में इस समस्या को उठाया। उन्होंने जानना चाहा कि टोटो के कारण होने वाली समस्या के समाधान के लिए सरकार क्या सोच रही है? शंकर ही नहीं, बल्कि राज्य के कई इलाकों के विधायक और आम लोग पिछले कुछ सालों से लगातार परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती को इस समस्या से अवगत कराते रहे हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कई मौकों पर अवैध टोटो को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर चुकी हैं। ऐसे में राज्य सरकार टोटो को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लाने जा रही है। पुलिस से बातचीत के बाद इस एसपीओ को तैयार करने का काम शुरू हो गया है। जिसका मसौदा तैयार हो चुका है। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नवान्न की मंजूरी मिलते ही एसओपी को लागू कर दिया जाएगा।