तस्लीमा नसरीन की कोलकाता वापसी, बोलीं- यहां अच्छा लग रहा है

Update: 2026-07-31 09:29 GMT

कोलकाता। बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को करीब दो दशक बाद कोलकाता लौटीं। अपनी विवादित आत्मकथा ‘द्विखंडितो’ को लेकर हुए विरोध और राजनीतिक विवाद के बाद उन्हें लगभग 20 साल पहले शहर छोड़ना पड़ा था। लंबे अंतराल के बाद जब वह पश्चिम बंगाल की राजधानी पहुंचीं तो उन्होंने कोलकाता लौटने पर खुशी जाहिर की।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद तस्लीमा नसरीन ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा, “मुझे यहां बहुत अच्छा लग रहा है।” उनके इस बयान के बाद एक बार फिर उनके कोलकाता से जुड़ाव और पुराने संबंधों की चर्चा शुरू हो गई है।




तस्लीमा नसरीन का कोलकाता से गहरा भावनात्मक रिश्ता रहा है। उन्होंने अपने लेखन और सार्वजनिक जीवन के दौरान कई वर्षों तक इस शहर को अपना ठिकाना बनाया। कोलकाता में उन्हें साहित्यिक पहचान और पाठकों का बड़ा समर्थन मिला, लेकिन उनकी रचनाओं को लेकर समय-समय पर विवाद भी होते रहे।

उनकी आत्मकथा ‘द्विखंडितो’ के प्रकाशन के बाद वर्ष 2007 में कोलकाता में विरोध प्रदर्शन हुए थे। विरोध की स्थिति के बाद उन्हें शहर छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वह भारत के अलग-अलग स्थानों पर रहीं और लंबे समय तक कोलकाता से दूर रहीं।

लेखिका ने कई मौकों पर कोलकाता के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया है। उनका कहना रहा है कि इस शहर से उनकी यादें, साहित्यिक यात्रा और व्यक्तिगत भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में लंबे अंतराल के बाद उनकी वापसी को उनके समर्थकों ने भावनात्मक क्षण बताया।

तस्लीमा नसरीन अपने बेबाक लेखन और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर विचार रखने के लिए जानी जाती हैं। उनके लेखन में महिलाओं के अधिकार, धार्मिक कट्टरता, सामाजिक असमानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे विषय प्रमुख रहे हैं। हालांकि, उनके कुछ विचारों और पुस्तकों को लेकर विवाद भी पैदा हुए हैं।

कोलकाता में उनकी वापसी के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी नजर रखी गई। एयरपोर्ट पर उनके पहुंचने की जानकारी के बाद लोगों में उत्सुकता दिखाई दी। हालांकि उन्होंने मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं की और केवल अपनी खुशी जाहिर की।

तस्लीमा नसरीन का साहित्यिक सफर बांग्लादेश से शुरू हुआ था। उनकी रचनाओं ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनकी आत्मकथात्मक रचनाओं में उनके व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक मुद्दों का उल्लेख मिलता है, जिसके कारण वे अक्सर चर्चा में रही हैं।

कोलकाता में उनके पुराने पाठकों और साहित्य जगत से जुड़े लोगों के बीच भी उनकी वापसी को लेकर दिलचस्पी देखी जा रही है। कई लोग इसे एक लंबे अंतराल के बाद साहित्य और शहर के बीच दोबारा जुड़ाव के रूप में देख रहे हैं।

हालांकि, उनकी वापसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं, क्योंकि अतीत में उनके लेखन को लेकर शहर में काफी विवाद हुआ था। उस समय विरोध प्रदर्शनों के कारण प्रशासन को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाने पड़े थे।

तस्लीमा नसरीन की कोलकाता यात्रा ऐसे समय में हुई है जब वह एक बार फिर अपने पुराने शहर से जुड़ने का अवसर पा रही हैं। उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया में जिस तरह खुशी जाहिर की, उससे यह साफ है कि कोलकाता उनके लिए केवल एक शहर नहीं बल्कि उनकी साहित्यिक और व्यक्तिगत यात्रा का अहम हिस्सा है।

करीब दो दशक बाद उनकी वापसी ने एक बार फिर उनके लेखन, विवादों और कोलकाता के साथ उनके रिश्ते को चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना होगा कि उनकी इस यात्रा के दौरान वह किन कार्यक्रमों में शामिल होती हैं और शहर में उनकी मौजूदगी किस तरह की प्रतिक्रिया पैदा करती है।

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