पश्चिम बंगाल : विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि पुलिस इस पहलू की भी जांच करेगी कि क्या बनर्जी को किसी व्यक्ति या राजनीतिक समूह की ओर से धमकी दी जा रही थी। उन्होंने बनर्जी के परिवार से फोन पर बातचीत कर संवेदना व्यक्त की और उन्हें एक अच्छा राजनीतिक नेता बताया।
आशीष बनर्जी का शव रविवार सुबह बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यालय में मिला था। यह कार्यालय हट्टाला पाड़ा इलाके में उनके आवास के पास स्थित है। पुलिस ने घटनास्थल से एक कथित सुसाइड नोट बरामद किया है। 74 वर्षीय बनर्जी के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। 
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आशीष बनर्जी के परिवार ने उन्हें बताया कि स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के साथ उनके संबंध अच्छे थे। अधिकारी के अनुसार क्षेत्र से निर्वाचित भाजपा विधायक ने भी उनके परिवार से मुलाकात कर सम्मान जताया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बनर्जी के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला दर्ज नहीं था और उन्हें पुलिस की तरफ से कोई नोटिस नहीं भेजा गया था।
अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद बनर्जी ने उन्हें संदेश भेजकर मिलने की इच्छा जताई थी। उन्होंने परिवार को जांच में पुलिस के साथ सहयोग करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने यह आशंका भी जताई कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ भ्रष्ट नेताओं ने बनर्जी पर दबाव बनाया हो सकता है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
उन्होंने बनर्जी के फोन और कॉल रिकॉर्ड की जांच की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री के मुताबिक पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि मौत से पहले बनर्जी से किन लोगों ने संपर्क किया था और क्या उन्हें कोई धमकी या दबाव दिया गया था। अधिकारी ने यह भी कहा कि वह जल्द उनके परिवार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे।
 अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर लगाया आरोप
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने घटना के लिए भाजपा सरकार और मीडिया के एक वर्ग द्वारा बनाए गए कथित दबाव को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि आधारहीन भ्रष्टाचार के आरोपों को लगातार बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने से आशीष बनर्जी मानसिक दबाव में थे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए जांच कराने की बात कही है। इस तरह बनर्जी की मौत को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
कथित नोट की जांच जारी
सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित नोट में लिखा है कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है और राजनीति में आना उनकी बड़ी गलती थी। इसमें उन्होंने दावा किया कि वह कभी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे तथा किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। नोट में पार्टी के भीतर गलत कार्यों को स्वीकार न कर पाने और उनका खुलकर विरोध न कर सकने का भी कथित उल्लेख है।
पुलिस ने अभी इस पत्र की प्रामाणिकता की अंतिम पुष्टि नहीं की है। लिखावट की जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि पत्र वास्तव में आशीष बनर्जी ने लिखा था या नहीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद मौत की परिस्थितियों पर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
 पांच बार रामपुरहाट से रहे विधायक
आशीष बनर्जी ने 2001 से 2026 तक लगातार 25 वर्षों तक रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वह पांच बार विधायक चुने गए और पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में उन्होंने स्कूली शिक्षा और कृषि सहित विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।
वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा उम्मीदवार ध्रुव साहा से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की बीरभूम जिला कोर कमेटी से इस्तीफा दे दिया था, हालांकि वह पार्टी के सामान्य सदस्य बने रहे। उनकी मौत के बाद राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस सभी संभावित कारणों की जांच कर रही है और लोगों से अपुष्ट पत्र या दावे प्रसारित नहीं करने की अपील की गई है।
Tags: