कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में पिछली सरकार के दौरान आयोजित किए गए सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में इस मामले को लेकर विस्तृत बयान दिया और आरोप लगाया कि इन शिविरों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अपने बयान के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने बिना नाम लिए तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें “धोखेबाज भतीजा” बताते हुए कहा कि अगर कानून की कार्रवाई शुरू हुई तो उन्हें कोई बचा नहीं पाएगा।
विधानसभा में उठाया सेबाश्रय शिविरों का मुद्दा
बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य विधानसभा में सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि डायमंड हार्बर क्षेत्र में आयोजित इन स्वास्थ्य शिविरों में पारदर्शिता का अभाव था और कई स्तरों पर अनियमितताएं हुईं।
उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और जांच के बाद तथ्य सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक प्रभाव या पद के आधार पर कानून से बचने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार सख्त रुख अपनाएगी।
अभिषेक बनर्जी पर अप्रत्यक्ष हमला
शुभेंदु अधिकारी ने अपने भाषण के दौरान तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में इसे अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग जनता के नाम पर योजनाएं चलाते हैं, लेकिन उनमें कथित गड़बड़ी करते हैं, उन्हें जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा और जांच के बाद किसी को भी बचने का मौका नहीं मिलेगा।
उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों की पृष्ठभूमि
सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविर डायमंड हार्बर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किए गए थे। इन शिविरों के जरिए लोगों को चिकित्सा जांच, स्वास्थ्य परामर्श और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया था।
हालांकि, अब इन्हीं शिविरों को लेकर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इन कार्यक्रमों के संचालन में वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर गड़बड़ियां हुईं।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी पहले भी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देती रही है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यक्रमों में किसी भी तरह की अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
राज्य में पिछले कुछ समय से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता रहा है। विभिन्न सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
विधानसभा में गरमाया राजनीतिक माहौल
मुख्यमंत्री के बयान के बाद विधानसभा का माहौल राजनीतिक रूप से गरमा गया। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव के बीच यह मामला एक नए विवाद के रूप में सामने आया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर रही है और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा। वहीं, तृणमूल कांग्रेस अक्सर आरोप लगाती रही है कि विपक्ष जांच एजेंसियों और राजनीतिक मुद्दों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करता है।
जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर
सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद अब सभी की नजर इस मामले में होने वाली जांच और संभावित कार्रवाई पर है।
यदि जांच में किसी तरह की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, आरोपों की सच्चाई जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
फिलहाल यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मुद्दा बन गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बयान ने जहां विपक्ष पर हमला तेज कर दिया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के रुख का इंतजार किया जा रहा है।