नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग और राज्य विधानसभा चुनावों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद रविशंकर प्रसाद ने पलटवार किया है। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में प्रसाद ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें लोकतंत्र और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोधियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि लोगों को मतदान करने और ग्राम पंचायत चुनावों में नामांकन दाखिल करने से रोका गया तथा विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रसाद ने इन्हीं आरोपों के आधार पर ममता बनर्जी की लोकतंत्र से जुड़ी टिप्पणियों पर सवाल उठाए। ये भाजपा नेता के आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
रविशंकर प्रसाद की प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है जब ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपना विरोध तेज किया है। बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इससे बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हुए। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनावों के दौरान मतदान और मतगणना से जुड़े CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित CCTV रिकॉर्ड सुरक्षित रहना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों की जांच की जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर CCTV कैमरों को बाधित किया गया और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई। ये आरोप ममता बनर्जी की ओर से लगाए गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के दौरान मतदाता सूची में किए गए बदलावों से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए। ममता ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाता इससे प्रभावित हुए और तृणमूल कांग्रेस की मजबूत पकड़ वाले निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का असर अधिक रहा।
ममता बनर्जी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और मतगणना प्रक्रिया को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में तृणमूल कांग्रेस बढ़त बनाए हुए थी, लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। उन्होंने सुरक्षा बलों पर भी उनके चुनाव एजेंटों को प्रभावित करने और मतगणना प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाए। हालांकि ये सभी आरोप तृणमूल कांग्रेस की ओर से किए गए राजनीतिक दावे हैं।
चुनाव आयोग ने अपने कामकाज और SIR प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों के बीच कहा है कि आयोग के भीतर विचारों में अंतर संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है और उसके आदेश कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं। आयोग से जुड़े विवाद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजी चल रही है।
SIR को लेकर विवाद अब केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं। INDIA गठबंधन से जुड़े दलों ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दों को लेकर संयुक्त कार्यक्रमों की घोषणा भी की है। वहीं NDA के कई सहयोगी दल चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के समर्थन में सामने आए हैं।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध जारी रखते हुए उनके पद छोड़ने की मांग भी की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों का विरोध किया है।
रविशंकर प्रसाद का ताजा बयान इसी राजनीतिक टकराव की अगली कड़ी है। उन्होंने ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब उनके शासनकाल के रिकॉर्ड पर सवाल उठाकर दिया है। उनके मुताबिक पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार के दौरान राजनीतिक और चुनावी अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए थे, इसलिए ममता बनर्जी की मौजूदा आलोचना स्वीकार्य नहीं है। यह भाजपा सांसद का राजनीतिक पक्ष है।
चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच मामला न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हुआ है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के साथ कानूनी घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव आयोग, SIR और विधानसभा चुनावों के संचालन को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने हैं। ममता बनर्जी जहां चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही हैं, वहीं भाजपा नेता उनके आरोपों को खारिज करते हुए उनके शासनकाल का रिकॉर्ड सामने रख रहे हैं। रविशंकर प्रसाद के ताजा बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।