कुर्मी समुदाय पर दर्ज पुराने मामले वापस लेने का सुवेंदु अधिकारी का ऐलान
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को कुर्मी समुदाय को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के दौरान आंदोलनों के समय कुर्मी समुदाय के लोगों पर दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लिया जाएगा।
सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने कुर्मी समुदाय के हितों के लिए काम करने के बजाय समुदाय में विभाजन पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बनने पर कुर्मी समुदाय से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने का वादा
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि कुर्मी समुदाय के लोगों पर आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कई लोगों पर ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, जो समुदाय से जुड़े अधिकारों और मांगों को लेकर किए गए आंदोलनों से संबंधित थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐसे मामलों को लेकर सरकार संवेदनशील रुख अपनाएगी।
कुर्माली और राजबंशी भाषा को लेकर बयान
अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी।
उन्होंने कहा कि भाषाओं को संवैधानिक मान्यता मिलने से इन भाषाओं के संरक्षण और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में भारत की 22 भाषाएं शामिल हैं। किसी भाषा को इसमें शामिल करने का निर्णय केंद्र सरकार और संसद की प्रक्रिया के माध्यम से होता है।
TMC सरकार पर लगाए आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने पिछली TMC सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने कुर्मी समुदाय के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की नीतियों के कारण समुदाय के लोगों में असंतोष बढ़ा। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी कुर्मी समुदाय की समस्याओं को समझते हुए काम करेगी।
कुर्मी समुदाय की मांगें
कुर्मी समुदाय लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज उठाता रहा है। इनमें सामाजिक और संवैधानिक पहचान से जुड़े मुद्दे, भाषा संरक्षण और अन्य मांगें शामिल हैं।
समुदाय की ओर से समय-समय पर आंदोलन भी किए गए हैं। इन्हीं आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को लेकर सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को बयान दिया।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में कुर्मी समुदाय एक महत्वपूर्ण सामाजिक समूह माना जाता है। समुदाय से जुड़े मुद्दे समय-समय पर राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं।
सुवेंदु अधिकारी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राज्य में विभिन्न सामाजिक समूहों को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति बना रहे हैं।
संवैधानिक प्रक्रिया का विषय
किसी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का विषय केंद्र सरकार के स्तर पर तय होता है। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होता है।
भाषाई मान्यता मिलने से किसी भाषा के अध्ययन, प्रचार-प्रसार और संरक्षण को संस्थागत समर्थन मिल सकता है।
आगे की राजनीति पर नजर
सुवेंदु अधिकारी के बयान के बाद कुर्मी समुदाय और राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
अधिकारी ने समुदाय से जुड़े मामलों को हल करने और भाषाओं को मान्यता दिलाने की बात कही है। वहीं, इन घोषणाओं पर आगे राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल कुर्मी समुदाय से जुड़े पुराने मामलों की वापसी और भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।