पुरुलिया। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आयोजित करम पर्व समारोह के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुड़मी समाज को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में जल्द प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रविवार को पुरुलिया के कड़ाडी मैदान में आयोजित करम पर्व समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। उनके बयान के बाद समारोह में मौजूद हजारों लोगों ने तालियों और जयकारों के साथ स्वागत किया।

कुड़मी समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग

कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। कुड़मी समाज के लोग इसे अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते रहे हैं।

करम पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज की इस मांग पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए प्रक्रिया जल्द शुरू करने की बात कही।

कड़ाडी मैदान में हुआ भव्य समारोह

पुरुलिया के टामना थाना क्षेत्र के कड़ाडी फुटबॉल मैदान में आयोजित करम पर्व समारोह में बड़ी संख्या में कुड़मी समाज के लोग शामिल हुए।

मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले ही मैदान लोगों से भर गया था। भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ।

समारोह में सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

40 हजार महिलाओं ने किया झूमर नृत्य

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण झूमर नृत्य रहा। बताया गया कि समारोह में करीब 40 हजार महिलाओं ने झूमर नृत्य के माध्यम से मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने पूरे कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दे दिया।

झूमर नृत्य कुड़मी समाज और पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों की प्रमुख लोक परंपराओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू कर पूरी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसलिए भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए कदम उठाए जाने जरूरी हैं।

समारोह में दिखी सांस्कृतिक एकजुटता

करम पर्व समारोह में कुड़मी समाज की सांस्कृतिक एकजुटता देखने को मिली। लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाया।

कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और अपनी संस्कृति, परंपराओं और भाषा के संरक्षण पर जोर दिया।

आठवीं अनुसूची में भाषा शामिल होने का महत्व

संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को विशेष संवैधानिक मान्यता प्राप्त होती है। वर्तमान में इस सूची में 22 भाषाएं शामिल हैं।

किसी भी नई भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

राजनीतिक और सामाजिक नजरिए से महत्वपूर्ण घोषणा

मुख्यमंत्री की यह घोषणा कुड़मी समाज के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे लंबे समय से समाज की प्रमुख मांगों में शामिल रहे हैं।

करम पर्व जैसे बड़े सामाजिक आयोजनों में इस तरह की घोषणा का अपना महत्व होता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में समुदाय के लोग मौजूद रहते हैं।

आगे प्रक्रिया पर रहेगी नजर

मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अब कुड़मी समाज की नजर आगे की प्रक्रिया पर रहेगी। भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

पुरुलिया में आयोजित करम पर्व समारोह इस बार सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में रहा।

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