कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। हालांकि, इस घोषणा के कुछ ही घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने हत्या मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

इसी बीच रेजीनगर सीट से ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया। इस तरह दोनों सीटों पर ममता गुट के उम्मीदवारों की वापसी ने उपचुनाव से पहले पार्टी की रणनीति और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।

नंदीग्राम और रेजीनगर समेत पश्चिम बंगाल की कुछ विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 18 सितंबर थी। इसी दिन नंदीग्राम और रेजीनगर में कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आए।

नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे ने वापस लिया नाम

नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। शुक्रवार को उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले उनके मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने की जानकारी सामने आई थी। नामांकन वापसी के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि उनके गुट ने नंदीग्राम में अलग उम्मीदवार नहीं उतारने और कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया है।

नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व लंबे समय से रहा है। 2007 में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन के बाद यह क्षेत्र राज्य की राजनीति के केंद्र में आया था। इसी आंदोलन ने ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में 2011 में वाम मोर्चा सरकार के लंबे शासन के अंत से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों में नंदीग्राम का नाम प्रमुखता से सामने आया।

2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला शुभेंदु अधिकारी से हुआ था। इसके बाद भी यह सीट राज्य की राजनीति में बेहद चर्चित बनी रही।

ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार को दिया समर्थन

संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के समर्थन का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनका गुट नंदीग्राम से अब कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगा और कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन करेगा।

हालांकि कांग्रेस की ओर से इस समर्थन को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया कि पार्टी ने ममता बनर्जी से समर्थन नहीं मांगा था। कांग्रेस नेताओं ने इसे ममता बनर्जी का राजनीतिक निर्णय बताया। इस घटनाक्रम के बाद नंदीग्राम उपचुनाव में विपक्षी खेमे के बीच संभावित तालमेल को लेकर चर्चा तेज हो गई।

समर्थन के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार

ममता बनर्जी के समर्थन की घोषणा के कुछ घंटे बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में लंबित वारंट के आधार पर की गई।

पुलिस की ओर से बताए गए अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ पुराना वारंट लंबित था और चुनाव से पहले लंबित वारंट की समीक्षा के दौरान इसे लागू किया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि इस कार्रवाई का उपचुनाव से संबंध नहीं है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और ममता बनर्जी के गुट ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों की ओर से आरोप लगाया गया कि ममता द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा के तुरंत बाद गिरफ्तारी होना संदेह पैदा करता है। ये राजनीतिक आरोप हैं, जबकि पुलिस ने गिरफ्तारी का आधार लंबित वारंट को बताया है।

पुराने मामले में गिरफ्तारी

मिलन प्रधान के चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ पुराने आपराधिक मामलों का उल्लेख होने की बात सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके खिलाफ 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कई मामलों का जिक्र किया गया है। हालांकि, किसी मामले में आरोपी होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि उनके खिलाफ लंबे समय से वारंट लंबित था तो चुनाव में नामांकन दाखिल करने के बाद ही कार्रवाई क्यों हुई। कांग्रेस नेताओं ने इसे चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर देखा और राज्य सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि कार्रवाई लंबित वारंट के आधार पर हुई।

रेजीनगर में भी TMC उम्मीदवार ने छोड़ा मैदान

नंदीग्राम के घटनाक्रम के बीच रेजीनगर सीट से ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी नामांकन वापस ले लिया। वह इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल कर चुके थे। उनके नामांकन वापस लेने से रेजीनगर में भी चुनावी समीकरण बदल गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार चौधरी ने चुनाव चिह्न को लेकर मतदाताओं के बीच पहचान बनाने में संभावित कठिनाई को नामांकन वापसी के कारणों में बताया। हालांकि, उनके फैसले को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

रेजीनगर में ममता बनर्जी के गुट की ओर से पहले उम्मीदवार उतारने का फैसला किया गया था, लेकिन नामांकन वापसी के बाद पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर सवाल उठे हैं। ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस का समर्थन घोषित किया, जबकि रेजीनगर को लेकर उन्होंने तत्काल कोई समान घोषणा नहीं की थी।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न का विवाद भी साथ

इन घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के भीतर विवाद भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बना हुआ है। चुनाव आयोग ने उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी के गुट को अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किया है। रिपोर्टों के अनुसार ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ चुनाव चिह्न दिया गया, जबकि विरोधी गुट को अलग नाम और चिह्न मिला।

इस बदलाव का सीधा असर उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार और मतदाताओं तक चुनाव चिह्न की पहचान पहुंचाने पर पड़ सकता है। रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी की नामांकन वापसी में भी चुनाव चिह्न से जुड़ी परेशानी का उल्लेख सामने आया है।

नंदीग्राम फिर बना राजनीतिक केंद्र

नंदीग्राम का मौजूदा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व रखती है। 2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन से लेकर 2021 के विधानसभा चुनाव तक नंदीग्राम कई बड़े राजनीतिक संघर्षों का केंद्र रहा है।

अब उपचुनाव से पहले पहले TMC उम्मीदवार की नामांकन वापसी, फिर ममता बनर्जी का कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन और उसके बाद उसी उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने चुनावी बहस को और तेज कर दिया है।

कांग्रेस और ममता गुट गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस इसे पुराने लंबित वारंट की कार्रवाई बता रही है। ऐसे में इस घटनाक्रम की राजनीतिक व्याख्या अलग-अलग दल अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं।

आगे की नजर चुनावी प्रक्रिया पर

अब नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव की आगे की प्रक्रिया में बचे हुए उम्मीदवारों और चुनाव प्रचार पर नजर रहेगी। नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उनकी चुनावी गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि गिरफ्तारी अपने आप में चुनाव लड़ने से अयोग्यता का अंतिम निर्धारण नहीं करती; यह संबंधित कानूनी और चुनावी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले इन दोनों सीटों पर राजनीतिक दलों की रणनीति, उम्मीदवारों का प्रचार और चुनाव आयोग की प्रक्रिया आगे की तस्वीर स्पष्ट करेगी। फिलहाल नंदीग्राम में TMC उम्मीदवार की वापसी और कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन के बाद हुई गिरफ्तारी ने इस सीट को एक बार फिर पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

रेजीनगर में भी TMC गुट के उम्मीदवार की नामांकन वापसी ने समीकरणों को प्रभावित किया है। दोनों सीटों पर सामने आए घटनाक्रमों के बाद अब चुनावी मुकाबले की दिशा शेष उम्मीदवारों के प्रचार और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगी।

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