बंगाल की सियासत में बवाल, अभिषेक बनर्जी ने पुलिसकर्मियों को दी खुली चेतावनी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने राज्य के पुलिस अधिकारियों को खुली चेतावनी दी है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि कुछ पुलिस अधिकारी मौजूदा भाजपा सरकार को खुश करने के लिए तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जानबूझकर निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों के नामों की सूची तैयार की जा रही है और राज्य में सरकार बदलने के बाद किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा। उनके इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। अभिषेक बनर्जी की यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर रहे पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन को कोलकाता पुलिस ने कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया है।
अभिषेक बनर्जी ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को पुलिस अधिकारियों के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के इशारे पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, कुछ पुलिस अधिकारी अच्छी पोस्टिंग और सरकार की कृपा हासिल करने के लिए विपक्षी दल के नेताओं और समर्थकों को परेशान कर रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी ने चेतावनी देते हुए कहा, 'मैं नामों की एक सूची तैयार कर रहा हूं। सरकार बदलने के बाद किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।' उन्होंने दावा किया कि जिन अधिकारियों को लगता है कि मौजूदा सरकार को खुश करके उन्हें बेहतर पद मिल गए हैं, उन्हें आने वाले समय में अपने कामों का जवाब देना पड़ेगा।
टीएमसी नेता ने कहा कि वह उन सभी पुलिस अधिकारियों की पहचान करेंगे, जो मुख्यमंत्री के निर्देश पर कथित रूप से विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दो साल बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं और तब ऐसे अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा होगी। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी पुलिस अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया।
अभिषेक बनर्जी ने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के एक आईपीएस अधिकारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित अधिकारी ने विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें जीत की बधाई दी थी, लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद वही अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक निष्पक्षता के खिलाफ बताया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बंगाल में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव लगातार बढ़ा है। वर्तमान में राज्य की सत्ता मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के पास है, जबकि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की भूमिका निभा रही है। दोनों दलों के बीच राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार के आरोपों, प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस की भूमिका को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी का आरोप है कि भाजपा सरकार प्रशासनिक एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ताओं को ऐसे मामलों में फंसाया गया है, जिनका वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। हालांकि पुलिस की ओर से दर्ज मामलों की कानूनी स्थिति और उनमें लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्णय जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
इस बीच पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री इंद्रनील सेन की गिरफ्तारी ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। इंद्रनील सेन को बुधवार, 28 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय की लंबी पूछताछ के बाद कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो और विशेष प्रवेश पास की बिक्री में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला दर्ज है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन कथित रूप से मासआर्ट सोसाइटी से जुड़े थे। इस संस्था पर दुर्गा पूजा आयोजनों में विशेष प्रवेश पास और प्रीव्यू शो के नाम पर धन जुटाने तथा वित्तीय अनियमितताएं करने के आरोप हैं। मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय और कोलकाता पुलिस अलग-अलग स्तर पर कर रही हैं।
जानकारी के मुताबिक, इंद्रनील सेन को बुधवार को साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। करीब चार घंटे की पूछताछ के बाद कोलकाता पुलिस की टीम उन्हें अपने साथ लालबाजार ले गई। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई। गुरुवार को अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए 10 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया।
इस मामले में शिकायतकर्ता जयदीप मुखर्जी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2022 से 2024 के बीच दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो के लिए महंगे टिकट बेचे गए। शिकायत में यह भी कहा गया कि कार्यक्रमों को यूनेस्को से जुड़ा बताकर लोगों से धन वसूला गया। जांच एजेंसियां इस कथित आर्थिक लेनदेन और जुटाई गई रकम के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल आरोप न्यायालय में साबित नहीं हुए हैं।
इंद्रनील सेन की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच लंबे समय से चल रही थी। उन्होंने दावा किया कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में केवल सेन की भूमिका नहीं हो सकती और जांच का दायरा अन्य प्रभावशाली लोगों तक भी पहुंच सकता है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लेते हुए भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आशंका जताई कि कथित अनियमितताओं से प्राप्त धन का लाभ अन्य लोगों को भी मिला हो सकता है। हालांकि इस संबंध में कोई निर्णायक प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इन आरोपों को फिलहाल राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी ने भाजपा सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने सिद्धांतों से समझौता करने से इनकार करते हैं, उन्हें जेल भेजा जा रहा है, जबकि गंभीर आरोपों का सामना करने वाले कुछ व्यक्तियों को भाजपा में शामिल होने के बाद राहत मिल जाती है। उन्होंने इस स्थिति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया।
अभिषेक बनर्जी के बयान ने प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्षता और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना कानून के अनुसार काम करे। वहीं किसी भी राजनीतिक दल के नेता द्वारा अधिकारियों के खिलाफ भविष्य में कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने पर भी सवाल उठ सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टीएमसी और भाजपा के बीच बढ़ता टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। एक ओर भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ रही है।
फिलहाल अभिषेक बनर्जी की पुलिस अधिकारियों को दी गई चेतावनी और पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की गिरफ्तारी ने बंगाल की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, अदालत के फैसले और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं से इस विवाद की आगे की दिशा तय होगी।