कोलकाता:  पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो और विशेष प्रवेश पास की बिक्री से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने मासआर्ट सोसाइटी के सचिव ध्रुवज्योति बोस उर्फ शुभो को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर दुर्गा पूजा के नाम पर विशेष प्रवेश पास बेचने और संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को (UNESCO) के नाम तथा लोगो का कथित तौर पर व्यावसायिक इस्तेमाल करने से जुड़े मामले में संलिप्तता का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोलकाता की बैंकशाल अदालत में पेश किया गया, जहां से 10 नवंबर 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। यह मामला वर्ष 2022 से 2025 के बीच आयोजित दुर्गा पूजा प्रीव्यू शो और विशेष प्रवेश पास की बिक्री से जुड़ा है। आरोप है कि मासआर्ट संस्था ने यूनेस्को की प्रतिष्ठा और दुर्गा पूजा को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता का इस्तेमाल कर लोगों से बड़ी रकम जुटाई।
दरअसल, वर्ष 2021 में कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में स्थान मिला था। इसके बाद दुर्गा पूजा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार को लेकर कई कार्यक्रम शुरू हुए। इसी दौरान मासआर्ट सोसाइटी ने बड़े पूजा पंडालों के विशेष दर्शन के लिए प्रीव्यू शो आयोजित करने शुरू किए। आरोप है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से विशेष प्रवेश पास बेचे गए और लोगों को यूनेस्को से आधिकारिक जुड़ाव होने का भरोसा दिलाया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन पासों की बिक्री से कितनी रकम जुटाई गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
24 प्रमुख पूजा पंडालों के लिए बेचे गए विशेष पास
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, मासआर्ट संस्था ने कोलकाता के करीब 24 प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों के प्रीव्यू शो आयोजित किए थे। इन कार्यक्रमों में आम श्रद्धालुओं से अलग विशेष प्रवेश की सुविधा देने के नाम पर पास बेचे जाते थे। कुछ पासों की कीमत 1,800 रुपये से लेकर 5,500 रुपये तक बताई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को व्यावसायिक रूप देकर बड़ी रकम एकत्र की गई। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप यूनेस्को के नाम और लोगो के कथित दुरुपयोग का है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संस्था ने लोगों के सामने खुद को यूनेस्को से जुड़ा आधिकारिक साझेदार बताने का प्रयास किया।
20 बैंक खातों में करोड़ों के लेनदेन का खुलासा
मामले की जांच के दौरान करीब 20 बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आई है। जांच अधिकारी इन खातों से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि संस्था को प्राप्त रकम किन कंपनियों और व्यक्तियों के खातों में भेजी गई। इसके अलावा संबंधित कंपनियों, संस्था के पदाधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
यूनेस्को से समझौते को लेकर उठे गंभीर सवाल
इस मामले में यूनेस्को के साथ संस्था के कथित समझौते को लेकर भी जांच तेज हो गई है। पुलिस ने यूनेस्को से संपर्क कर इस संबंध में जानकारी मांगी थी। यूनेस्को ने पश्चिम बंगाल के सूचना एवं संस्कृति विभाग के साथ आधिकारिक संवाद होने की बात स्वीकार की है। हालांकि, किसी संस्था या विभाग के साथ व्यावसायिक उपयोग के लिए समझौता होने से इनकार किया है। इस जानकारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संस्था ने किस आधार पर यूनेस्को के नाम और लोगो का इस्तेमाल किया और क्या इसके लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी।
पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन भी हो चुके हैं गिरफ्तार
गौरतलब है कि इस मामले में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। उन्हें 28 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय और कोलकाता पुलिस की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। मासआर्ट सोसाइटी की अध्यक्ष इंद्रनील सेन की पत्नी मधुछंदा सेन हैं, जबकि ध्रुवज्योति बोस सचिव के पद पर कार्यरत थे। संस्था के अन्य पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। प्रवर्तन निदेशालय ने इससे पहले मामले से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की थी। एजेंसी कथित धनशोधन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
10 नवंबर तक पुलिस हिरासत, पूछताछ में खुल सकते हैं नए तथ्य
मासआर्ट सचिव ध्रुवज्योति बोस की गिरफ्तारी को इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। पुलिस अब उनसे पासों की बिक्री, रकम के लेनदेन, यूनेस्को के नाम के इस्तेमाल और संबंधित कंपनियों के बारे में पूछताछ करेगी। जांच अधिकारी यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या इससे जुड़े अन्य दस्तावेज या वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है। आने वाले दिनों में पुलिस की पूछताछ और वित्तीय दस्तावेजों की जांच से इस पूरे मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
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