कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में हुए भीषण गोदाम हादसे के चार दिन बाद भी राहत एवं बचाव अभियान (रेस्क्यू ऑपरेशन) युद्ध स्तर पर जारी है। मलबे में दबे एक और घायल व्यक्ति की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने के बाद इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या बढ़कर 16 हो गई है। मरने वालों में घटना की प्राथमिकी (FIR) में नामजद मुख्य ठेकेदार भी शामिल है, जिसका शव मलबे से निकाला गया है। आपदा की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के साथ-साथ भारतीय रेलवे की तकनीकी टीमों को भी मलबे को काटने और हटाने के काम में लगा दिया गया है।
अस्पताल में एक और घायल ने तोड़ा दम, 17 का इलाज जारी
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शनिवार को अस्पताल में उपचाराधीन बासंती निवासी खालेक सरदार की घावों के कारण मौत हो गई। इसके साथ ही मृतकों का आंकड़ा 16 तक पहुंच गया है। वहीं, मलबे से जिंदा निकाले गए 17 अन्य घायलों का कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
हादसे के रूट की जांच के लिए बनी SIT, मुख्य ठेकेदार की भी मौत
कोलकाता के तारातला में बीते बुधवार की दोपहर एक बहुमंजिला निर्माणाधीन गोदाम की छत ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने लापरवाही और अवैध निर्माण की धाराओं के तहत कुल 5 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल मुख्य ठेकेदार का शव भी पुलिस और बचाव दलों ने घटनास्थल पर मलबे के नीचे से बरामद किया है। पुलिस ने पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रहा है।
बचाव अभियान में शामिल हुई भारतीय रेलवे
मलबे के विशाल ढेर में तब्दील हो चुके गोदाम में लोहे और स्टील के भारी-भरकम गार्डर तथा कंक्रीट के मुड़े हुए ढांचे को हटाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था। NDRF द्वारा मलबे को तेजी से काटने और हटाने के लिए तकनीकी सहायता मांगे जाने के बाद शुक्रवार को भारतीय रेलवे भी इस महा-अभियान में शामिल हो गया है। रेलवे की क्रेन और गैस-कटर टीमों की मदद से मुड़े हुए स्टील के ढांचों को सावधानीपूर्वक काटा जा रहा है।
हाईटेक तकनीक और मोबाइल टावर डेटा से हो रही तलाश
बचाव दल मलबे में फंसे संभावित जीवित लोगों या शवों का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। संकीर्ण जगहों में देखने के लिए विशेष कैमरों को मलबे के अंदर डाला जा रहा है। इसके अलावा, मलबे के नीचे दबे उन लोगों की सटीक लोकेशन ट्रैक करने के लिए स्थानीय मोबाइल फोन टावरों के डंप डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनके मोबाइल फोन हादसे के बाद भी सक्रिय या ऑन दिखाई दे रहे हैं।
तलाश पूरी होने के बाद ही हटेगा मुख्य मलबा: प्रशासन
प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ किया है कि उनकी पहली प्राथमिकता हर एक जिंदगी को तलाशना है। जब तक रेस्क्यू टीमें इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जातीं कि मलबे के नीचे अब कोई भी इंसान नहीं फंसा है, तब तक भारी मशीनों से बड़े पैमाने पर मलबा हटाने का काम शुरू नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि इस दुखद घटना पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है, वहीं राज्य सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 12-12 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।