विधानसभा में नया नियम लागू करेंगे CM शुभेंदु, विधायकों को मिलेगा बड़ा अधिकार

Update: 2026-07-20 13:41 GMT

Kolkata कोलकाता :   पश्चिम बंगाल विधानसभा के इतिहास में सोमवार 20 जुलाई का दिन एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में दर्ज हुआ। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधायकों के अधिकारों और जनता से जुड़े मुद्दों के समाधान को लेकर सदन में एक बड़ी घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस फैसले ने सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष को भी चौंका दिया है। विपक्षी नेता फिरहाद हकीम ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत और विधायकों के सम्मान से जोड़कर देखा है।

दरअसल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में घोषणा की कि अब सदन के रेफरेंस फेज यानी मेंशन आवर के दौरान विधायक जो भी जनहित से जुड़े मुद्दे उठाएंगे, उन्हें सात दिनों के भीतर संबंधित विभागों तक पहुंचाना अनिवार्य होगा। उन्होंने अधिकारियों और मंत्रियों को निर्देश दिया कि विधायकों द्वारा उठाए गए मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मुद्दे का समाधान संभव है तो उस पर काम किया जाना चाहिए। वहीं, यदि किसी कारण से किसी मांग या समस्या का समाधान तुरंत संभव नहीं है या उसमें अधिक समय लग सकता है तो इसकी स्पष्ट जानकारी भी सदन में दी जानी चाहिए। इससे विधायकों और जनता को स्थिति की सही जानकारी मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की घोषणा की। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उठाए गए इन मुद्दों की सूची सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) भेजी जाएगी। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय इन मामलों की निगरानी करेगा। उन्होंने खुद हर तीन महीने में इन मुद्दों पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने की बात कही।

मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम ने भी इसकी जमकर तारीफ की। उन्होंने मुख्यमंत्री के फैसले को विधानसभा की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने वाला कदम बताया।

फिरहाद हकीम ने कहा कि मुख्यमंत्री अधिकारी ने विधायकों को सम्मान देने की दिशा में एक नया उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के इतिहास में इस तरह की व्यवस्था पहले कभी देखने को नहीं मिली। लंबे समय तक विधायक रहने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के प्रति इस तरह का नजरिया बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि विधायक जनता और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। जब विधानसभा में जनता की समस्याएं उठाई जाती हैं तो उनका समाधान होना लोकतंत्र की मूल भावना है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से विधायकों को अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाने और उनके समाधान की उम्मीद बढ़ेगी।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मुख्यमंत्री का यह कदम विधानसभा की कार्यप्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल विधायकों को अपने क्षेत्रों की समस्याओं पर प्रभावी कार्रवाई का भरोसा मिलेगा, बल्कि सरकार और जनता के बीच संवाद भी मजबूत होगा।

अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि इस नई व्यवस्था के तहत विधानसभा में उठाए गए मुद्दों पर विभाग कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और तीन महीने बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट में क्या जानकारी सामने आती है।

Tags:    

Similar News