पश्चिम बंगाल : राजनीति में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार सोमवार को विधानसभा में ऐतिहासिक UCC विधेयक पेश करने जा रही है। इस कदम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है।
प्रस्तावित UCC कानून के तहत शादी, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म से परे सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रावधान होगा। भाजपा ने इसे अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया था और सरकार बनने के छह महीने के भीतर लागू करने का वादा किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर समान नागरिक कानून को समानता सुनिश्चित करने वाला कदम बताया था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संकेत दिया है कि पश्चिम बंगाल में भी उत्तराखंड, असम और अन्य राज्यों की तर्ज पर UCC लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सोमवार को विधानसभा में इस विधेयक पर विस्तार से चर्चा होगी। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे राज्य की सामाजिक विविधता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की बैठक में निर्देश दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता विधानसभा के अंदर और बाहर इस बिल का जोरदार विरोध करेंगे।
विपक्ष का आरोप है कि यह कानून बिना व्यापक सामाजिक सहमति के लागू किया जा रहा है, जिससे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। वहीं सरकार इसे समानता और एकरूपता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। इस मुद्दे ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में विधानसभा में जोरदार बहस और विरोध प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है।