कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र को 20 जून तक एक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें कहा गया था कि वह मनरेगा के तहत बंगाल को धन क्यों नहीं जारी कर रहा है।
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में बंगाल के लिए 100 दिवसीय ग्रामीण नौकरी योजना के तहत धन जारी करने पर राज्य में अनुदान की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए रोक लगा दी थी।
प्रधान न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ ने पश्चिम बांग्ला खेत मजदूर एसोसिएशन की एक प्रार्थना के बाद आदेश जारी किया जिसमें आरोप लगाया गया था कि योजना के तहत उसके सदस्यों को मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया था क्योंकि केंद्र ने अनुदान जारी करना बंद कर दिया था।
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील बिलवदल भट्टाचार्य ने प्रार्थना का विरोध करते हुए कहा कि फंड जारी नहीं किया गया था क्योंकि राज्य द्वारा केंद्र सरकार को सौंपी गई कार्रवाई रिपोर्ट में कई अनियमितताएं पाई गई थीं।
वकील ने आरोप लगाया कि योजना के तहत मस्टर रोल तैयार करने के लिए जिला प्रशासन फर्जी जॉब कार्ड धारकों का इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह योजना के तहत आवंटित राशि का गबन किया गया।
भट्टाचार्य ने दावा किया कि कई मामलों में यह पाया गया है कि योजना के तहत काम करने वाले वास्तविक जॉब कार्ड धारकों को पैसा नहीं मिला था।
याचिका के आधार पर, अदालत ने राज्य से जांच करने को कहा कि क्या वास्तविक लोगों को योजना का लाभ मिल रहा है। खंडपीठ ने केंद्र से 20 जून तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। एक सप्ताह बाद राज्य को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
खंडपीठ ने कहा कि मामला जुलाई में फिर से सुनवाई के लिए आएगा
बंगाल सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता सम्राट सेन ने कहा कि राज्य ने 2 फरवरी को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सौंप दी थी और केंद्र सरकार से योजना के तहत धन जारी करने का अनुरोध किया था। लेकिन केंद्र सरकार चुप्पी साधे बैठी रही और योजना के तहत राशि देना बंद कर दिया।
खंडपीठ ने केंद्र सरकार के वकील से सेन की दलील के संबंध में केंद्र का दृष्टिकोण बताने को कहा।कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र को 20 जून तक एक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें कहा गया था कि वह मनरेगा के तहत बंगाल को धन क्यों नहीं जारी कर रहा है।
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में बंगाल के लिए 100 दिवसीय ग्रामीण नौकरी योजना के तहत धन जारी करने पर राज्य में अनुदान की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए रोक लगा दी थी।
प्रधान न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की पीठ ने पश्चिम बांग्ला खेत मजदूर एसोसिएशन की एक प्रार्थना के बाद आदेश जारी किया जिसमें आरोप लगाया गया था कि योजना के तहत उसके सदस्यों को मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया था क्योंकि केंद्र ने अनुदान जारी करना बंद कर दिया था।
केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील बिलवदल भट्टाचार्य ने प्रार्थना का विरोध करते हुए कहा कि फंड जारी नहीं किया गया था क्योंकि राज्य द्वारा केंद्र सरकार को सौंपी गई कार्रवाई रिपोर्ट में कई अनियमितताएं पाई गई थीं।
वकील ने आरोप लगाया कि योजना के तहत मस्टर रोल तैयार करने के लिए जिला प्रशासन फर्जी जॉब कार्ड धारकों का इस्तेमाल कर रहा है। इस तरह योजना के तहत आवंटित राशि का गबन किया गया।
भट्टाचार्य ने दावा किया कि कई मामलों में यह पाया गया है कि योजना के तहत काम करने वाले वास्तविक जॉब कार्ड धारकों को पैसा नहीं मिला था।
याचिका के आधार पर, अदालत ने राज्य से जांच करने को कहा कि क्या वास्तविक लोगों को योजना का लाभ मिल रहा है। खंडपीठ ने केंद्र से 20 जून तक अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। एक सप्ताह बाद राज्य को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
खंडपीठ ने कहा कि मामला जुलाई में फिर से सुनवाई के लिए आएगा
बंगाल सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता सम्राट सेन ने कहा कि राज्य ने 2 फरवरी को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सौंप दी थी और केंद्र सरकार से योजना के तहत धन जारी करने का अनुरोध किया था। लेकिन केंद्र सरकार चुप्पी साधे बैठी रही और योजना के तहत राशि देना बंद कर दिया।
खंडपीठ ने केंद्र सरकार के वकील से सेन की दलील के संबंध में केंद्र का दृष्टिकोण बताने को कहा।
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