हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में एमबीबीएस इंटर्न छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने ठेला लगाकर राजमा-चावल बेचे और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। यह प्रदर्शन इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर किया गया। छात्रों का कहना है कि मेडिकल की लंबी और कठिन पढ़ाई पूरी करने के बाद भी इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला मानदेय उनकी मेहनत और जिम्मेदारी के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने ‘MBBS इंटर्न ठेला’ लगाकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
30 हजार रुपये स्टाइपेंड की मांग
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस इंटर्न लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं। छात्रों की मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपये किया जाए। उनका कहना है कि कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को इससे ज्यादा राशि दी जा रही है। छात्रों के मुताबिक, इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, आपातकालीन सेवाओं और मेडिकल कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है।
राजमा-चावल बेचकर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने ठेले पर राजमा-चावल बेचकर सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा। छात्रों का कहना था कि अगर डॉक्टरों को उचित स्टाइपेंड नहीं मिलेगा तो उन्हें भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका यह तरीका सोशल मीडिया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने छात्रों के इस अनोखे प्रदर्शन को समर्थन दिया।
काले फीते के साथ भी किया था प्रदर्शन
इससे पहले भी हल्द्वानी के एमबीबीएस छात्रों और इंटर्न ने अपनी मांगों को लेकर काला फीता बांधकर प्रदर्शन किया था। छात्रों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की थी। छात्रों का कहना है कि उनकी मांग केवल आर्थिक लाभ की नहीं बल्कि इंटर्न डॉक्टरों के काम और योगदान को उचित सम्मान देने की है।
सरकार से सकारात्मक फैसले की उम्मीद
एमबीबीएस इंटर्न छात्रों ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द विचार करेगी। उनका कहना है कि वे मरीजों की सेवा पूरी जिम्मेदारी से करते रहेंगे, लेकिन उनकी आर्थिक समस्याओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हल्द्वानी में हुआ यह प्रदर्शन अब मेडिकल छात्रों की स्टाइपेंड व्यवस्था को लेकर चल रही बहस का हिस्सा बन गया है।