ताड़ीखेत। उत्तराखंड के ताड़ीखेत ब्लॉक मुख्यालय में स्वतंत्रता सेनानी रामदत्त पांडेय की मूर्ति के अनावरण को लेकर मंगलवार को सियासी माहौल गरमा गया। जिस कार्यक्रम का उद्घाटन शाम को केंद्रीय राज्य मंत्री और क्षेत्रीय विधायक की मौजूदगी में होना तय था, वह दोपहर में ही संपन्न हो गया। ब्लॉक प्रमुख बबली मेहरा ने समर्थकों के साथ पहुंचकर मूर्ति का अनावरण कर दिया। कार्यक्रम के दौरान तालियां तो बजीं, लेकिन इसके साथ ही ब्लॉक की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई।

मामला निमंत्रण को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख बबली मेहरा के नाराज होने के बाद उन्होंने तय समय से पहले ही कार्यक्रम स्थल पहुंचकर मूर्ति का अनावरण कर दिया। इसके बाद शाम के कार्यक्रम और इसकी तैयारियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं।

शाम को होना था मुख्य कार्यक्रम

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम ताड़ीखेत ब्लॉक मुख्यालय में स्वतंत्रता सेनानी रामदत्त पांडेय की मूर्ति का अनावरण कार्यक्रम प्रस्तावित था। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और क्षेत्रीय विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था।

आयोजकों की ओर से कार्यक्रम की तैयारियां काफी पहले से की जा रही थीं। मंच सजावट, अतिथियों के स्वागत और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई थी। योजना के अनुसार शाम को मुख्य अतिथियों की मौजूदगी में फीता काटकर मूर्ति का अनावरण किया जाना था।

निमंत्रण नहीं मिलने से नाराजगी

बताया जा रहा है कि ब्लॉक प्रमुख बबली मेहरा को कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिलने से नाराजगी थी। इसी नाराजगी के चलते वह अपने समर्थकों के साथ मंगलवार दोपहर कार्यक्रम स्थल पहुंच गईं।

ब्लॉक प्रमुख के पहुंचने के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच हलचल शुरू हो गई। उन्होंने समर्थकों की मौजूदगी में स्वतंत्रता सेनानी रामदत्त पांडेय की मूर्ति का अनावरण कर दिया। इस दौरान मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर कार्यक्रम पूरा किया।

सियासी रंग लेने लगा मामला

मूर्ति अनावरण के बाद यह मामला सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ब्लॉक की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। क्षेत्र में इसे जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों के बीच प्रोटोकॉल और सम्मान को लेकर अक्सर विवाद सामने आते हैं। ताड़ीखेत का यह मामला भी अब इसी तरह की राजनीतिक खींचतान के रूप में देखा जा रहा है।

समर्थकों के साथ पहुंचीं ब्लॉक प्रमुख

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ब्लॉक प्रमुख बबली मेहरा अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंचीं और बिना शाम के निर्धारित कार्यक्रम का इंतजार किए मूर्ति का अनावरण कर दिया।

हालांकि, इस दौरान किसी बड़े विवाद की स्थिति नहीं बनी, लेकिन कार्यक्रम के समय को लेकर सवाल जरूर उठने लगे। समर्थकों का कहना था कि ब्लॉक प्रमुख स्थानीय जनप्रतिनिधि हैं और उन्हें कार्यक्रम में उचित सम्मान मिलना चाहिए था।

मंत्री और विधायक का कार्यक्रम बना चर्चा का विषय

शाम के कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल की मौजूदगी प्रस्तावित थी। लेकिन उससे पहले ही अनावरण हो जाने के बाद कार्यक्रम की स्थिति बदल गई।

अब चर्चा इस बात को लेकर है कि शाम के कार्यक्रम में मंत्री और विधायक की भूमिका क्या होगी और इस घटनाक्रम पर उनकी प्रतिक्रिया क्या रहती है।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा

मामले के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा होने लगी है। हालांकि अभी तक किसी बड़े नेता की ओर से खुलकर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वतंत्रता सेनानी की मूर्ति का अनावरण सम्मान का विषय था, लेकिन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और निमंत्रण को लेकर पैदा हुआ विवाद इसे राजनीतिक रंग दे गया।

आगे बढ़ सकती है सियासी हलचल

फिलहाल ताड़ीखेत में मूर्ति अनावरण का कार्यक्रम पूरा हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

स्वतंत्रता सेनानी रामदत्त पांडेय की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम अब स्थानीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। फीता तो समय से पहले कट गया, लेकिन इसके बाद ब्लॉक की सियासत का तापमान जरूर बढ़ गया है।

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