बदरीनाथ धाम में टूटा श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड, पहली बार 17.79 लाख से ज्यादा भक्तों ने किए दर्शन
चमोली। उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के बाद अब बदरीनाथ धाम में भी दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बुधवार तक बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 17 लाख 79 हजार 805 से अधिक हो गई। धाम के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक यात्रा सीजन में भगवान बदरीविशाल के दर्शन के लिए पहुंचे हैं।
इस बार खास बात यह है कि बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने में अभी डेढ़ महीने से अधिक का समय बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। पिछले वर्ष पूरे यात्रा सीजन में बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 17 लाख 78 हजार 298 रही थी। इस बार यात्रा समाप्त होने से काफी पहले ही पिछले साल का आंकड़ा पीछे छूट गया है।
बदरीनाथ धाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को चारधाम यात्रा के प्रति बढ़ती आस्था और बेहतर होती यात्रा व्यवस्थाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। बदरीनाथ के साथ केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी पूरे यात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली है।
पिछले साल का रिकॉर्ड टूटा
वर्ष 2025 में बदरीनाथ धाम में 17 लाख 78 हजार 298 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार बुधवार तक यह आंकड़ा 17 लाख 79 हजार 805 को पार कर गया। यानी पिछले साल के पूरे यात्रा सीजन की तुलना में इस बार अभी से ज्यादा श्रद्धालु धाम पहुंच चुके हैं।
कपाट बंद होने में अभी काफी समय होने के कारण नया रिकॉर्ड और आगे जा सकता है। शारदीय नवरात्र और त्योहारी सीजन के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं। ऐसे में बदरीनाथ धाम में दर्शन करने वालों की संख्या आने वाले दिनों में तेजी से बढ़ सकती है।
यमुनोत्री और गंगोत्री में भी रिकॉर्ड
बदरीनाथ से पहले यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या नया रिकॉर्ड बना चुकी है। चारधाम यात्रा उत्तराखंड के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन आयोजनों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से इन धामों के दर्शन करने पहुंचते हैं।
यात्रा के दौरान मौसम और पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती होती हैं। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या चारधाम यात्रा के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दिखाती है।
25 साल में लगातार बढ़ा श्रद्धालुओं का ग्राफ
पिछले करीब 25 वर्षों के आंकड़ों को देखा जाए तो उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के प्रति श्रद्धालुओं का आकर्षण लगातार बढ़ता गया है। कुछ असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है।
वर्ष 2013 में केदारनाथ क्षेत्र में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने चारधाम यात्रा को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। आपदा के बाद कुछ वर्षों तक यात्रा को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगा। इसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या दोबारा बढ़ने लगी।
कोरोना महामारी के दौरान भी चारधाम यात्रा पर बड़ा असर पड़ा था। संक्रमण रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों और यात्रा संबंधी नियमों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में भारी कमी आई। महामारी का असर कम होने और यात्रा सामान्य रूप से शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में फिर तेजी से वृद्धि दर्ज की गई।
सुविधाओं में बढ़ोतरी से भी बढ़ी यात्रा
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के मार्गों पर सड़क, स्वास्थ्य, पार्किंग, पेयजल, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। डिजिटल पंजीकरण और यात्रा से जुड़ी ऑनलाइन सुविधाओं ने भी श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में भूमिका निभाई है।
चारधाम यात्रा के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखना होती है। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक मौसम खराब होने, भूस्खलन और मार्ग बाधित होने जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है बड़ा सहारा
चारधाम यात्रा धार्मिक महत्व के साथ उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। यात्रा सीजन में होटल, धर्मशाला, टैक्सी, बस, दुकान, ढाबा और घोड़ा-खच्चर संचालकों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है।
बदरीनाथ और अन्य धामों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने का सीधा असर आसपास के बाजारों और पर्यटन कारोबार पर पड़ता है। यात्रा मार्गों पर स्थित छोटे कस्बों और गांवों में भी कारोबार बढ़ता है। यही कारण है कि चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण गतिविधियों में गिना जाता है।
कपाट बंद होने तक और बढ़ेगा आंकड़ा
बदरीनाथ धाम में 17.79 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने के बाद अब नजर यात्रा सीजन के अंतिम आंकड़े पर है। कपाट बंद होने में अभी डेढ़ महीने से अधिक का समय बाकी होने के कारण इस वर्ष का अंतिम आंकड़ा पिछले सभी रिकॉर्ड से काफी आगे जा सकता है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन के लिए यात्रा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। मौसम में बदलाव के साथ पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ने लगेगी। ऐसे में यात्रियों को मौसम की जानकारी लेकर और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए यात्रा करने की सलाह दी जाती है।
यमुनोत्री और गंगोत्री के बाद बदरीनाथ धाम में बना नया रिकॉर्ड इस वर्ष की चारधाम यात्रा की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है। यात्रा समाप्त होने तक बदरीनाथ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कहां तक पहुंचती है, अब इस पर नजर रहेगी।