Nainital: न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा में दो अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत, हाईकोर्ट ने बैठने की अनुमति दी

Update: 2026-04-20 15:14 GMT

Nainital। उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) 2023 की मुख्य परीक्षा को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को होने वाली मुख्य परीक्षा में दो अभ्यर्थियों को अंतरिम अनुमति दे दी है। अब दोनों अभ्यर्थी बिना किसी अड़चन के परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने अभ्यर्थी अंशुका भंडारी एवं अनुश्री खत्री की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी। दोनों अभ्यर्थियों ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बावजूद मुख्य परीक्षा से बाहर किए जाने का विरोध किया था।क्या था पूरा मामला?उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) की प्रारंभिक परीक्षा 31 अगस्त 2025 को आयोजित की गई थी। अंशुका भंडारी और अनुश्री खत्री सहित 83 अभ्यर्थी इस प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किए गए थे। इन सभी अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा के लिए परीक्षा शुल्क भी जमा कर दिया था।लेकिन प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए कुछ प्रश्नों को लेकर हाईकोर्ट में अलग याचिकाएं दायर की गईं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रारंभिक परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन के निर्देश दिए। पुनर्मूल्यांकन के बाद आयोग ने कुछ अभ्यर्थियों को मेरिट सूची से बाहर कर दिया, जिनमें अंशुका भंडारी और अनुश्री खत्री भी शामिल थीं।सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवालायाचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया। पहला- रण विजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और दूसरा- हरि किशन बनाम राजस्थान हाईकोर्ट।

दोनों फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण होने के बाद अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें पहले सफल घोषित किया जा चुका था। बाद में पुनर्मूल्यांकन के आधार पर मेरिट से हटाना सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों के विपरीत है। खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं पर गौर करते हुए कहा कि अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए दोनों अभ्यर्थियों को 21 अप्रैल को होने वाली मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति अंतिम फैसले के अधीन होगी और उनका अंतिम चयन परीक्षा के परिणाम पर निर्भर करेगा।अभ्यर्थियों की मांगअंशुका भंडारी और अनुश्री खत्री ने याचिका में मांग की थी कि उन्हें मुख्य परीक्षा में बैठने का अधिकार दिया जाए क्योंकि उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी और शुल्क भी जमा कर दिया था। उन्होंने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए।यह फैसला उन सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए राहत भरा है जो प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद पुनर्मूल्यांकन में बाहर हो जाते हैं। न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थी लंबे समय से तैयारी करते हैं। बीच में ऐसी अड़चनों से उनका पूरा साल प्रभावित हो जाता है।UKPSC पर उठे सवालइस मामले में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं। कई अभ्यर्थी आरोप लगाते रहे हैं कि प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों में गड़बड़ियां रह जाती हैं और बाद में पुनर्मूल्यांकन के नाम पर मनमानी की जाती है। हाईकोर्ट का यह फैसला UKPSC को भी संदेश देता है कि अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखकर पारदर्शी तरीके से परीक्षा प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।अगली सुनवाईहाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई बाद की तारीख पर तय की है। तब तक दोनों अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में बैठ सकेंगे। यदि अंतिम फैसला उनके पक्ष में आया तो उनका चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।यह फैसला उत्तराखंड न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे सैकड़ों युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि हाईकोर्ट ने सही दिशा में फैसला लिया है।

Tags:    

Similar News