देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी भूमि, निवेश और उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड यानी UIIDB को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेताओं को “नाराज फूफा” बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास का काम हो, नया निवेश आए या युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार हों, कांग्रेस के नेताओं को हर अच्छी पहल से परेशानी होने लगती है।

मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस पर परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को पारदर्शिता, सुशासन और विकास पर आधारित राजनीति रास नहीं आ रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए निवेश आकर्षित करने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनाने की दिशा में काम कर रही है।

धामी ने कहा कि UIIDB का गठन प्रदेश के विकास को गति देने, आधारभूत संरचना मजबूत करने और निवेश की संभावनाओं को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार का प्रयास है कि अनुपयोगी या कम उपयोग में आ रही सरकारी संपत्तियों और भूमि का नियमानुसार बेहतर इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कांग्रेस पर इस पहल को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस के समय जमीनें बिकने का लगाया आरोप

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में जमीनें बेची जाती थीं, जबकि वर्तमान सरकार में प्रत्येक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि निवेश से संबंधित निर्णय निर्धारित नियमों और जवाबदेही के साथ लिए जा रहे हैं। सरकार प्रदेश के हित और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

धामी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने अब तक 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जब सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हो रहा था, तब उसके नेताओं ने आवाज क्यों नहीं उठाई। मुख्यमंत्री के मुताबिक अब जब सरकार भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर विकास और सार्वजनिक हित में उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रही है तो कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए यही बातें कहीं। उनके बयान में UIIDB, निवेश, रोजगार और अतिक्रमण मुक्त कराई गई सरकारी भूमि का उल्लेख किया गया है। हालांकि, 13 हजार एकड़ भूमि से जुड़ा आंकड़ा मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का दावा है। इसकी परियोजनावार तथा जिलावार विस्तृत जानकारी इस बयान के साथ उपलब्ध नहीं कराई गई।  

UIIDB को लेकर क्यों बढ़ा विवाद

UIIDB का पूरा नाम उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड है। इसका गठन प्रदेश में निवेश और आधारभूत संरचना से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार का कहना है कि बोर्ड के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर बड़ी परियोजनाएं विकसित की जा सकेंगी। इससे राज्य में निवेश आएगा, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों का विस्तार होगा तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

दूसरी ओर, विपक्षी दल सरकारी विभागों की जमीन UIIDB को सौंपने और उसे निजी निवेश से जुड़ी परियोजनाओं में इस्तेमाल करने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि पर्वतीय राज्य में भूमि बेहद संवेदनशील विषय है, इसलिए किसी भी सरकारी जमीन के हस्तांतरण या व्यावसायिक उपयोग से पहले पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। जमीन के उपयोग, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय लोगों के हितों को लेकर भी स्पष्टता की मांग की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने इन्हीं सवालों पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि विपक्ष विकास योजनाओं का तथ्यात्मक विरोध करने के बजाय हर सरकारी पहल पर राजनीतिक विवाद खड़ा कर रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की राजनीति लंबे समय तक परिवारवाद और तुष्टिकरण के इर्द-गिर्द घूमती रही है, इसलिए उन्हें वर्तमान सरकार की पारदर्शी व्यवस्था स्वीकार नहीं हो रही है।

रोजगार और निवेश को बताया प्राथमिकता

धामी ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार देना और उत्तराखंड को निवेश के लिए बेहतर गंतव्य बनाना है। निवेश आने से उद्योग, पर्यटन, सेवा क्षेत्र और आधारभूत संरचना से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आएगी। इससे स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना बढ़ेगी।

सरकार का तर्क है कि प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए भूमि और आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। UIIDB इसी प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का माध्यम है। हालांकि, विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों को देखते हुए बोर्ड की निर्णय प्रक्रिया, भूमि चयन, परियोजनाओं की शर्तों और निवेशकों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी सार्वजनिक करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण होगा।

बयान के कुछ शब्दों पर भी बहस संभव

मुख्यमंत्री के बयान में कांग्रेस नेताओं के लिए “नाराज फूफा” और “मियां” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। “मियां” वाले संदर्भ का स्पष्ट राजनीतिक आशय आधिकारिक बयान में विस्तार से नहीं बताया गया। ऐसे में इस शब्द को किसी समुदाय से जोड़कर प्रस्तुत करना भ्रामक हो सकता है। इसे मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान तक सीमित संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

इस मामले पर कांग्रेस की ताजा विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद उसका पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल मुख्यमंत्री के तीखे हमले से साफ है कि UIIDB और सरकारी भूमि का मुद्दा आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। सरकार इसे विकास, निवेश और रोजगार से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष पारदर्शिता और राज्य के भूमि संसाधनों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहा है।

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