देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बॉलीवुड के मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता और देहरादून जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे नौटियाल के इस फैसले के बाद उत्तराखंड की राजनीति, विशेष रूप से देहरादून जिले के चकराता और विकासनगर क्षेत्र में नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
भाजपा से इस्तीफे के बाद कांग्रेस में वापसी
रामशरण नौटियाल ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। इसके बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई थीं।
सोमवार को कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया।
रामशरण नौटियाल पहले भी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के दौरान कांग्रेस संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई थीं।
वर्ष 2014 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। करीब 12 साल बाद अब उनकी कांग्रेस में वापसी हुई है।
पार्टी में सम्मान नहीं मिलने से थे नाराज
रामशरण नौटियाल ने भाजपा छोड़ने के पीछे पार्टी संगठन में सम्मान नहीं मिलने को प्रमुख कारण बताया था।
इस्तीफे के बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि लंबे समय तक पार्टी के लिए काम करने के बावजूद उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला।
उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपमानित किए जाने और संगठन में अनुशासनहीनता होने की बात भी कही थी।
नौटियाल ने दावा किया था कि भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं की कार्यशैली से वह लंबे समय से असंतुष्ट थे।
हालांकि, ये उनके व्यक्तिगत आरोप हैं और भाजपा नेतृत्व का पक्ष इससे अलग हो सकता है।
चकराता से लड़ चुके हैं विधानसभा चुनाव
रामशरण नौटियाल उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं।
उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर देहरादून जिले की चकराता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
इस चुनाव में उनका मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह से हुआ था। हालांकि, नौटियाल को हार का सामना करना पड़ा था।
इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखी।
अब कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनकी भविष्य की चुनावी भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं
रामशरण नौटियाल का राजनीतिक अनुभव केवल विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है।
वह देहरादून जिला पंचायत के अध्यक्ष रह चुके हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में काम करने के दौरान उन्हें स्थानीय प्रशासन, पंचायत व्यवस्था और ग्रामीण विकास से संबंधित विषयों पर काम करने का अनुभव मिला।
चकराता, विकासनगर और आसपास के क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक सक्रियता रही है।
इसी कारण उनके दल बदलने को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सदस्यता
नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की मौजूदगी में रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
उनकी वापसी ऐसे समय हुई है, जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल संगठनात्मक तैयारियों में जुटे हैं।
कांग्रेस के लिए यह अवसर पहले पार्टी से जुड़े रहे एक अनुभवी क्षेत्रीय नेता की वापसी का है।
हालांकि, उनके शामिल होने से चुनावी परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी।
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव पर नजर
उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में प्रस्तावित है।
राज्य की 70 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दल अपनी तैयारियां कर रहे हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी।
वहीं कांग्रेस को 19 सीटों पर सफलता मिली थी।
अब आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में समर्थन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
विकासनगर और सहसपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा
रामशरण नौटियाल के भाजपा छोड़ने के बाद उनके भविष्य के चुनावी क्षेत्र को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं।
कुछ राजनीतिक चर्चाओं में विकासनगर और सहसपुर विधानसभा सीटों का नाम सामने आया था।
हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए रामशरण नौटियाल की उम्मीदवारी या सीट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
ऐसे में वह किस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे या संगठन में कौन-सी जिम्मेदारी संभालेंगे, यह पार्टी के आगामी निर्णयों से स्पष्ट होगा।
इस्तीफे पर भाजपा में भी हुई थी चर्चा
सितंबर के अंतिम दिनों में रामशरण नौटियाल के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद भाजपा की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई थीं।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने शुरुआती समय में इस्तीफा मिलने की जानकारी होने से इनकार किया था।
वहीं पार्टी के मीडिया प्रभारी ने भी कहा था कि संगठन को औपचारिक रूप से इस्तीफे की सूचना नहीं मिली है।
इसके बाद रामशरण नौटियाल ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की बात दोहराई थी।
अब उनके कांग्रेस में शामिल होने के बाद दल बदल की स्थिति स्पष्ट हो गई है।
गायक जुबिन नौटियाल के पिता हैं रामशरण
रामशरण नौटियाल की पहचान उत्तराखंड के क्षेत्रीय नेता होने के साथ लोकप्रिय बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के पिता के रूप में भी है।
जुबिन नौटियाल हिंदी फिल्म संगीत के चर्चित गायकों में शामिल हैं।
उन्होंने हिंदी फिल्मों और स्वतंत्र संगीत परियोजनाओं में कई लोकप्रिय गीत गाए हैं।
हालांकि, रामशरण नौटियाल की राजनीतिक गतिविधियां उनके बेटे के संगीत करियर से अलग रही हैं।
रामशरण वर्षों से उत्तराखंड में स्थानीय राजनीति, पंचायत प्रशासन और राजनीतिक दलों के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे हैं।
उत्तराखंड में तेज हुई राजनीतिक हलचल
रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।
एक ओर भाजपा छोड़ने के पीछे उन्होंने संगठन में सम्मान नहीं मिलने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में शामिल होकर उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का नया अध्याय शुरू किया है।
उनकी वापसी का प्रभाव विशेष रूप से देहरादून जिले के चकराता और आसपास के क्षेत्रों की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाती है या संगठन में कोई जिम्मेदारी सौंपती है।
फिलहाल रामशरण नौटियाल के भाजपा से कांग्रेस में आने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में दलों के संगठनात्मक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।