देहरादून : उत्तराखंड सरकार ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के निजी स्कूलों को स्कूल मानक प्राधिकरण (School Standards Authority) के तहत अनिवार्य ऑडिट प्रक्रिया से गुजरना होगा। स्कूलों को फीस, दाखिले और अन्य मदों से प्राप्त धनराशि का पूरा विवरण प्राधिकरण के सामने प्रस्तुत करना होगा।

सरकार का उद्देश्य निजी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना और अभिभावकों से ली जाने वाली फीस के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। ऑडिट के माध्यम से स्कूलों की वित्तीय व्यवस्था, सुविधाओं और नियमों के पालन की जांच की जाएगी।
फीस और आय का देना होगा हिसाब
नए प्रावधान के तहत निजी स्कूलों को अपनी फीस संरचना, प्रवेश शुल्क, अन्य शुल्क और विभिन्न स्रोतों से होने वाली आय का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा। प्राधिकरण यह देखेगा कि स्कूल नियमों के अनुसार फीस ले रहे हैं या नहीं। इसके अलावा स्कूलों को यह भी बताना होगा कि छात्रों से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। इससे अभिभावकों की शिकायतों को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्कूल मानकों की होगी जांच
स्कूल मानक प्राधिकरण केवल आर्थिक मामलों की ही नहीं, बल्कि स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता की भी समीक्षा करेगा। इसमें शिक्षकों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जांच शामिल होगी। सरकार का मानना है कि ऑडिट से स्कूलों में जवाबदेही बढ़ेगी और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।
निजी स्कूलों पर बढ़ेगी निगरानी
उत्तराखंड में निजी स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार लंबे समय से स्कूलों की फीस और व्यवस्थाओं को लेकर निगरानी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही थी अभिभावकों की ओर से कई बार फीस वृद्धि और अतिरिक्त शुल्क को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। नए नियमों के बाद ऐसी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।
नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई
प्राधिकरण की ओर से तय मानकों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जा सकती है। स्कूलों को निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करानी होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। उत्तराखंड में निजी स्कूलों का अनिवार्य ऑडिट लागू होने के बाद अब स्कूल प्रबंधन को अपनी वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित रखना होगा।

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