उत्तराखंड के उच्च हिमालयी इलाकों में शुरू होगी जनगणना 131 गांवों में घर-घर पहुंचेगी टीम
देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी और बर्फीले क्षेत्रों में मंगलवार से जनगणना अभियान शुरू होने जा रहा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों के गांवों और निकाय क्षेत्रों में जनगणना का काम किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
जनगणना निदेशक ईवा श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश के इन चार जिलों के 131 गांवों और तीन निकाय क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों की गणना की जाएगी। इस अभियान के लिए 182 प्रगणक और पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। ये कर्मचारी निर्धारित क्षेत्रों में जाकर लोगों से जानकारी जुटाएंगे।
30 सितंबर तक चलेगा अभियान
अधिकारियों के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों में शुरू होने वाली यह जनगणना 30 सितंबर तक जारी रहेगी। दुर्गम इलाकों को देखते हुए विशेष योजना तैयार की गई है, ताकि किसी भी परिवार की गणना से वंचित न रह जाए।
बर्फीले और पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम और रास्तों की चुनौती को देखते हुए कर्मचारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि जनगणना कार्य को समय पर पूरा करने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया है।
दुर्गम क्षेत्रों में विशेष तैयारी
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कई गांव ऐसे हैं जहां पहुंचना आसान नहीं होता। कई इलाकों में सड़क संपर्क सीमित है और मौसम तेजी से बदलता रहता है। ऐसे में जनगणना टीमों के लिए विशेष तैयारी की गई है।
प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के अनुसार जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि टीमों को जरूरी प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें सुरक्षित तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
घर-घर जाकर जुटाई जाएगी जानकारी
जनगणना के दौरान प्रगणक प्रत्येक घर तक पहुंचकर निर्धारित जानकारी दर्ज करेंगे। इसका उद्देश्य क्षेत्र की आबादी, सामाजिक स्थिति और अन्य आवश्यक आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से जुटाना है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे जनगणना टीमों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं और अभियान में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया है, जिससे भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलती है।
ओटीपी और पासवर्ड नहीं मांगे जाएंगे
जनगणना निदेशक ईवा श्रीवास्तव ने लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए भी सतर्क किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी कोई संवेदनशील जानकारी नहीं मांगी जाएगी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी ओटीपी या वित्तीय जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति जनगणना के नाम पर ऐसी जानकारी मांगता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था
दुर्गम इलाकों में जनगणना कार्य को सुरक्षित और सुचारू रूप से पूरा करने के लिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को टीमों की मदद करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जनगणना टीमों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रदेश के लिए अहम अभियान
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में जनगणना का काम मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोगों तक पहुंचना और सही आंकड़े जुटाना प्रशासन के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।
इस अभियान से राज्य के सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों की वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक स्थिति की जानकारी प्राप्त होगी। यह आंकड़े भविष्य में विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और सरकारी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल प्रशासन ने जनगणना अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। मंगलवार से शुरू होने वाली यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी, जिसमें चार जिलों के सैकड़ों दूरस्थ गांवों और निकाय क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा।