उत्तराखंड में 2027 के लिए भाजपा का मिशन 60 प्लस, कार्यसमिति में चुनावी रणनीति पर मंथन
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों को गति देने के संकेत दे दिए हैं। प्रदेश भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की दिशा और प्राथमिकताएं तय करने के साथ संगठन और सरकार के सामने मौजूद चुनौतियों पर व्यापक मंथन किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में हुई बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेशभर से आए पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक का मुख्य फोकस संगठन को चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार करने और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर रहा। पार्टी नेतृत्व ने 2027 में 60 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अभी से बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया। कार्यसमिति में यह संदेश भी दिया गया कि चुनावी तैयारी केवल चुनाव की घोषणा के बाद शुरू करने के बजाय लगातार अभियान के रूप में आगे बढ़ाई जाए।
सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने पर जोर
भाजपा के लिए 2027 का चुनाव मौजूदा सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर हासिल करने का अवसर होगा। कार्यसमिति में सरकार की योजनाओं और फैसलों को व्यापक स्तर पर जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई। पार्टी की कोशिश रहेगी कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया जाए और उन्हें संगठन से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के फैसलों को भाजपा चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण आधार बना सकती है। समान नागरिक संहिता, महिला सशक्तीकरण, धार्मिक स्थलों और पर्यटन क्षेत्र में विकास, रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों को पार्टी के प्रमुख मुद्दों में शामिल किए जाने की संभावना है।
बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की कवायद
मिशन 60 प्लस के लिए भाजपा का सबसे बड़ा जोर संगठनात्मक मजबूती पर रहने वाला है। कार्यसमिति में बूथ समितियों को सक्रिय करने, पन्ना प्रमुखों की भूमिका को प्रभावी बनाने और कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद पर जोर दिया गया। पार्टी का लक्ष्य है कि प्रत्येक बूथ पर संगठन की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्रवार रणनीति तैयार करने पर भी जोर रहेगा। पहाड़ी जिलों में पलायन, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, जबकि मैदानी जिलों में कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास, रोजगार और शहरी सुविधाएं चुनावी विमर्श को प्रभावित कर सकती हैं।
2022 के प्रदर्शन से आगे जाने की चुनौती
भाजपा के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती अपने पिछले विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को बेहतर करने की है। 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में भाजपा ने 2022 में 47 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को 19 सीटें मिली थीं। भाजपा ने सरकार तो दोबारा बनाई, लेकिन उसका प्रदर्शन 2017 के मुकाबले कमजोर रहा। 2017 में पार्टी ने 56 सीटों पर जीत हासिल की थी।
ऐसे में 2027 में 60 प्लस का लक्ष्य हासिल करने के लिए भाजपा को 2022 के मुकाबले कम से कम 13 अतिरिक्त सीटें जीतनी होंगी। यह लक्ष्य पार्टी के लिए खासा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसके लिए उसे उन विधानसभा क्षेत्रों में अपना प्रदर्शन सुधारना होगा जहां पिछले चुनाव में विपक्ष ने उसे कड़ी चुनौती दी थी।
कमजोर सीटों पर विशेष नजर
भाजपा की रणनीति में कमजोर विधानसभा सीटों की पहचान कर वहां संगठन को पहले से मजबूत करने पर विशेष जोर रह सकता है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी पार्टी के लिए चुनौती रही है। वहीं कुमाऊं क्षेत्र में भी कई सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला था।
पार्टी के सामने स्थानीय स्तर पर विधायकों के खिलाफ संभावित नाराजगी को दूर करने की चुनौती भी होगी। लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद सरकार के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कामकाज का भी जनता के स्तर पर मूल्यांकन होता है। ऐसे में टिकट वितरण के समय भाजपा को जीत की संभावना, स्थानीय समीकरण और विधायक के प्रदर्शन जैसे पहलुओं पर विचार करना पड़ सकता है।
विपक्ष के मुद्दों का जवाब देने की तैयारी
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आगामी चुनाव में बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा सकते हैं। इन मुद्दों पर भाजपा को अभी से अपना जवाब और राजनीतिक नैरेटिव तैयार करना होगा।
कार्यसमिति के मंथन में यह बात भी महत्वपूर्ण रही कि विपक्ष के आरोपों का जवाब केवल प्रदेश स्तर पर नहीं, बल्कि जिला, मंडल और बूथ स्तर तक दिया जाए। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी देने की कवायद तेज की जा सकती है।
धामी फैक्टर और संगठन का तालमेल
2027 के चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की छवि भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। सरकार के स्तर पर लिए गए फैसलों को राजनीतिक संदेश के साथ जनता तक पहुंचाने में संगठन की भूमिका अहम होगी। इसके लिए सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकता स्पष्ट है कि उत्तराखंड में भाजपा की सत्ता को न केवल बरकरार रखा जाए, बल्कि सीटों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की जाए।
60 प्लस के लिए दस मोर्चों पर परीक्षा
भाजपा के मिशन 60 प्लस की राह में कई राजनीतिक और संगठनात्मक परीक्षाएं होंगी। इनमें कमजोर सीटों को मजबूत करना, विपक्षी वोटों के संभावित ध्रुवीकरण से निपटना, विधायकों के खिलाफ नाराजगी दूर करना, टिकट वितरण में संतुलन, संगठन में गुटबाजी रोकना, युवाओं और रोजगार के मुद्दे का समाधान, पहाड़ में पलायन की चुनौती, मैदानी क्षेत्रों में स्थानीय समीकरण, सरकार की उपलब्धियों का प्रचार और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता प्रमुख हैं।
कुल मिलाकर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से भाजपा ने 2027 की चुनावी तैयारियों का रोडमैप सामने रखने की शुरुआत कर दी है। पार्टी के सामने अब चुनौती इस रोडमैप को जमीन पर लागू करने की है। 47 सीटों से 60 प्लस तक पहुंचने के लिए भाजपा को न केवल सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाना होगा, बल्कि हर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए अलग रणनीति भी बनानी होगी। आने वाले महीनों में संगठन की सक्रियता और सरकार के प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्ष की रणनीति यह तय करेगी कि भाजपा का मिशन 60 प्लस कितना सफल होता है।