लखनऊ: स्वतंत्रता दिवस से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत के विभाजन को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने 1947 में हुए देश के बंटवारे और उसके बाद हुई हिंसा के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
लखनऊ में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के विभाजन का फैसला भारत के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाजन और उसके बाद हुए नरसंहार के लिए कांग्रेस की नीतियां जिम्मेदार थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर उस समय देश का नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे मजबूत नेता के हाथों में होता तो भारत का विभाजन नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता के कारण कोई भी देश को बांटने का साहस नहीं कर सकता था।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर आजादी के समय नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री होते तो देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता था। उन्होंने मोदी के नेतृत्व को मजबूत और निर्णायक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को विस्थापन, हिंसा और पीड़ा का सामना करना पड़ा। परिवार बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी को याद रखना जरूरी है ताकि आने वाली पीढ़ियां इतिहास से सीख ले सकें।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास के दर्दनाक अध्यायों को भूलना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि भारत ने विभाजन के बाद भी मजबूती के साथ आगे बढ़ते हुए दुनिया में अपनी पहचान बनाई। देश के लोगों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद मेहनत और संघर्ष से विकास की नई कहानी लिखी।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय राजनीतिक स्वार्थों के कारण देश को विभाजन का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि विभाजन का दर्द आज भी कई परिवारों की यादों में मौजूद है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन के दौरान जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई और जिन परिवारों ने कठिनाइयां झेलीं, उनकी पीड़ा को याद करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें देश की एकता और अखंडता के महत्व का संदेश देता है।
कार्यक्रम में विभाजन के दौरान प्रभावित हुए लोगों और उनके परिवारों को भी याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इतिहास की घटनाओं से सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए प्रयास करने चाहिए।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने की संभावना है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पहले भी विभाजन को लेकर बीजेपी नेताओं के बयानों पर आपत्ति जताते रहे हैं।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि विभाजन की त्रासदी को याद करना जरूरी है और इससे इतिहास की सच्चाई सामने आती है। वहीं विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि बीजेपी राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास के मुद्दों को उठाती है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हर साल 14 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान मारे गए और प्रभावित हुए लोगों को याद करना है।
इस अवसर पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विभाजन के समय की घटनाओं, लोगों के संघर्ष और उस दौर की पीड़ा को याद किया जाता है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।