लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के लोकभवन में मिशन कर्मयोगी के तहत आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के लिए सही व्यक्ति को सही पद पर तैनात करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। अधिकारियों की योग्यता, कार्यक्षमता और उपलब्धियों को महत्व देते हुए उनकी जिम्मेदारियां तय करने की दिशा में काम किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान सरकारी कर्मचारियों की वार्षिक गोपनीय आख्या (एसीआर) और पदोन्नति को उनके वास्तविक कार्य प्रदर्शन से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की सफलता केवल योजनाएं बनाने में नहीं, बल्कि उन योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने में है।
सही व्यक्ति को सही पद पर मिलेगी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों की क्षमताओं का सही आकलन जरूरी है।उन्होंने 'राइट पर्सन फॉर द राइट रोल' की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारियों की तैनाती उनकी योग्यता और कार्यक्षमता के अनुरूप होनी चाहिए।इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों को उचित जिम्मेदारी देना है, जो संबंधित कार्य को प्रभावी तरीके से पूरा कर सकें।मुख्यमंत्री ने क्षमता विकास आयोग से डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के साथ मिलकर इस दिशा में काम करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की उपलब्धियों और सफल कार्यों को उनकी सेवा संबंधी मूल्यांकन प्रणाली से जोड़ने पर विचार किया जाना चाहिए।
एसीआर और प्रमोशन में दिखेगा काम का असर
कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की पदोन्नति और कार्य प्रदर्शन के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने की आवश्यकता बताई।उन्होंने कहा कि केवल पद पर लंबे समय तक बने रहना ही किसी कर्मचारी की दक्षता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।अधिकारियों की वास्तविक उपलब्धियां, समस्याओं के समाधान की क्षमता और जनता को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण हैं।मुख्यमंत्री के अनुसार, कर्मचारियों के अच्छे कार्यों और सफल प्रयासों को वार्षिक गोपनीय आख्या तथा पदोन्नति से जोड़ने की दिशा में काम होना चाहिए।हालांकि, इस संबंध में नई नियुक्ति या पदोन्नति नीति लागू होने का कोई अंतिम आदेश अभी सामने नहीं आया है।
आम आदमी को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की।उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को अपने छोटे से काम के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यक्षमता पर सवाल खड़ा करता है।सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है कि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं, किसान और जरूरतमंद व्यक्ति सरकारी कार्यालयों में इस उम्मीद से आते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा।यदि उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़े, तो लोकसेवा का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।उन्होंने नागरिकों की संतुष्टि को लोकसेवकों के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण आधार बताया।
केवल प्रशिक्षण प्रमाणपत्र से नहीं बढ़ेगी दक्षता
मुख्यमंत्री ने मिशन कर्मयोगी के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की उपयोगिता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं होना चाहिए।प्रशिक्षण के माध्यम से कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वास्तविक सुधार दिखाई देना चाहिए।सरकारी सेवाएं सरल हों, शिकायतों का समाधान तेजी से हो और जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े, यही प्रशिक्षण की सफलता का आधार होना चाहिए।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी पद प्राप्त करने के बाद लगातार नई तकनीक और कार्यप्रणाली सीखना आवश्यक है।उन्होंने अधिकारियों को अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहने की सलाह दी।
प्रशासनिक अकादमी बनेगी एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की पहल पर जोर दिया।इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक के उपयोग में दक्ष बनाना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय में प्रशासनिक सेवाओं को तकनीक के अनुरूप विकसित करना जरूरी है।एआई आधारित तकनीकों का उपयोग सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने, आंकड़ों के विश्लेषण और प्रशासनिक निर्णयों में सहायता के लिए किया जा सकता है।हालांकि, ऐसी तकनीकों का उपयोग करते समय जवाबदेही, पारदर्शिता और नागरिकों के हितों की सुरक्षा भी जरूरी होगी।
पंचायतों और नगर निकायों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गांवों और शहरों की स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों को मजबूत बनाने की आवश्यकता भी बताई।उन्होंने कहा कि पंचायतें और नगर निकाय शासन व्यवस्था की बुनियादी इकाइयां हैं।इन संस्थाओं की कार्यक्षमता बेहतर होने से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।मुख्यमंत्री ने पंचायतों और नगर निकायों में काम करने वाले कर्मचारियों के प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास को प्राथमिकता देने की बात कही।उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक दक्षता बढ़ने से आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक आसानी से मिल सकेगा।
आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी
लखनऊ में आयोजित 'साधना श्रृंखला-2026' की तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला दो दिवसीय है।इसका आयोजन क्षमता विकास आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से किया गया है।कार्यशाला में उत्तरी क्षेत्र के आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।इस आयोजन में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी, प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुख और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक, तकनीक आधारित और दक्षता केंद्रित संस्थाओं के रूप में विकसित करने के लिए रणनीति तैयार करना है।
सरकारी कामकाज में जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात से निर्धारित होती है कि वह आम जनता के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाती है।उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे अपने कार्यों को केवल औपचारिक जिम्मेदारी मानकर पूरा न करें, बल्कि नागरिकों की समस्याओं को समझते हुए उनका समाधान करें।मुख्यमंत्री ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय को भी जरूरी बताया।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई समस्याओं का समाधान केवल एक विभाग के माध्यम से नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में अलग-अलग विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
मिशन कर्मयोगी से प्रशासन में बदलाव की उम्मीद
मिशन कर्मयोगी केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाना और प्रशासन को नागरिक केंद्रित बनाना है।इस कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों को उनकी भूमिका के अनुसार प्रशिक्षण देने और नई तकनीकों से परिचित कराने पर जोर दिया जाता है।उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी अवधारणा के आधार पर प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।मुख्यमंत्री का मानना है कि सक्षम और संवेदनशील कर्मचारी ही सुशासन के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकते हैं।
Tags: