लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वन्यजीवों की अवैध तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की संयुक्त टीम ने एक संदिग्ध वन्यजीव तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से सात दुर्लभ और संरक्षित फॉलकन बाज बरामद किए हैं। बरामद पक्षियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ 40 लाख रुपये बताई जा रही है। एसटीएफ के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी के तार कथित तौर पर अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर दुर्लभ वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त और तस्करी के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। संरक्षित पक्षियों को पकड़ना, उनका अवैध परिवहन करना और उन्हें बेचने का प्रयास करना वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत गंभीर अपराध हो सकता है। जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि बरामद बाज कहां से लाए गए थे और उन्हें किस स्थान पर पहुंचाने की योजना थी।
संयुक्त टीम ने की बड़ी कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूपी एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम ने लखनऊ में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से सात फॉलकन बाज बरामद किए गए।
एसटीएफ का दावा है कि आरोपी वन्यजीवों की अवैध तस्करी से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा है। हालांकि, इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और इसकी गतिविधियां किन राज्यों या देशों तक फैली हैं, इसका पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।जांच एजेंसियां बरामद पक्षियों के स्रोत, परिवहन के रास्ते और संभावित खरीदारों से संबंधित जानकारी जुटा रही हैं।
मुंबई का रहने वाला है गिरफ्तार आरोपी
एसटीएफ की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान फिरोज मुसर्रत खान के रूप में हुई है। वह महाराष्ट्र के मुंबई स्थित भायखला इलाके का निवासी बताया गया है।संयुक्त टीम ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को शाम करीब 7:30 बजे लखनऊ के मदेयगंज थाना क्षेत्र के इरादतनगर मोहल्ले में कार्रवाई की थी। इस दौरान आरोपी के कब्जे से सात दुर्लभ बाजों के अलावा एक मोबाइल फोन और आधार कार्ड भी बरामद हुआ।
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि मुंबई का एक व्यक्ति प्रतिबंधित पक्षियों की खेप लेकर लखनऊ पहुंचने वाला है। इसी सूचना के आधार पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई।
यूपी के जंगलों से खाड़ी देशों तक तस्करी का आरोप
एसटीएफ के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका गिरोह उत्तर प्रदेश के विभिन्न जंगलों से दुर्लभ और संरक्षित पक्षियों को पकड़ता था।इनमें गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगलों का नाम सामने आया है। आरोप है कि यहां से पक्षियों को इकट्ठा करने के बाद लखनऊ और मुंबई के रास्ते विदेश भेजने की व्यवस्था की जाती थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह के संभावित विदेशी ठिकानों में दुबई, सऊदी अरब और बहरीन शामिल हैं। हालांकि, बरामद सातों बाजों को किस देश में भेजा जाना था और उनका खरीदार कौन था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।एसटीएफ अब इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और संभावित स्थानीय शिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
बरामद बाजों की कीमत को लेकर अलग-अलग दावे
बरामद सात फॉलकन बाजों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत को लेकर मीडिया रिपोर्टों में अंतर सामने आया है।पीटीआई-भाषा की रिपोर्ट में इनकी अनुमानित कीमत 1 करोड़ 40 लाख रुपये बताई गई है। वहीं, कुछ अन्य समाचार संस्थानों ने कीमत करीब 14 करोड़ रुपये बताई है।
ऐसे में आधिकारिक मूल्यांकन स्पष्ट होने तक किसी एक राशि को अंतिम कीमत मानना उचित नहीं होगा। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में संरक्षित पक्षियों की बरामदगी को वन्यजीव तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।
क्यों होती है दुर्लभ फॉलकन बाजों की तस्करी?
फॉलकन यानी बाज अपनी तेज उड़ान, शिकार करने की क्षमता और विशेष शारीरिक बनावट के लिए जाने जाते हैं। दुनिया के कुछ हिस्सों में प्रशिक्षित बाजों का इस्तेमाल पारंपरिक बाजपालन और शिकार से जुड़ी गतिविधियों में किया जाता है।
विशेष रूप से खाड़ी देशों में बाजपालन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा रही है। हालांकि, वहां सभी प्रकार के बाजपालन या पक्षियों का व्यापार अवैध नहीं है। अवैधता इस बात पर निर्भर करती है कि पक्षी किस प्रजाति का है, उसे कहां से प्राप्त किया गया है और उसके परिवहन तथा व्यापार के लिए आवश्यक अनुमति उपलब्ध है या नहीं।
संरक्षित जंगली पक्षियों को बिना वैध अनुमति पकड़ना और उनकी तस्करी करना गंभीर वन्यजीव अपराध हो सकता है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा
एसटीएफ के बयान के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ मदेयगंज थाने में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 49, 50 और 51 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।ये प्रावधान संरक्षित वन्यजीवों के शिकार, उनके अवैध कब्जे, व्यापार, तलाशी और दंड से संबंधित हैं।बरामद पक्षियों की प्रजाति की सटीक पहचान और उनकी कानूनी संरक्षण श्रेणी भी मामले की आगे की जांच में महत्वपूर्ण होगी।फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मोबाइल फोन से मिल सकते हैं अहम सुराग
गिरफ्तार आरोपी के पास से बरामद मोबाइल फोन को जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एजेंसियां इसके माध्यम से तस्करी से जुड़े संभावित संपर्कों और अन्य जानकारी का पता लगा सकती हैं।जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि पक्षियों को पकड़ने, रखने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी।इसके अलावा विदेशों में संभावित खरीदारों और तस्करी के आर्थिक लेनदेन की जानकारी भी जांच का विषय बन सकती है।हालांकि, मोबाइल फोन से किसी विशेष व्यक्ति या विदेशी नेटवर्क का संपर्क प्रमाणित होने की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
दुर्लभ पक्षियों की तस्करी से पर्यावरण को खतरा
वन्यजीवों की अवैध तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी गंभीर समस्या है।बाज जैसे शिकारी पक्षी प्राकृतिक खाद्य शृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये विभिन्न छोटे जीवों की आबादी के प्राकृतिक संतुलन में योगदान देते हैं।
जंगली पक्षियों को पकड़ने और लंबी दूरी तक अवैध तरीके से ले जाने से उन्हें चोट, तनाव और मृत्यु का खतरा हो सकता है। दुर्लभ प्रजातियों के मामले में ऐसी गतिविधियां उनके संरक्षण प्रयासों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की चुनौती
लखनऊ में सात दुर्लभ बाजों की बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान अब कथित तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान पर है।यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि पक्षियों को जंगलों से किसने पकड़ा, उन्हें किस रास्ते से लखनऊ पहुंचाया गया और विदेश भेजने की कथित योजना में कौन-कौन शामिल था।
एसटीएफ और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त कार्रवाई ने एक संदिग्ध अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का मामला सामने लाया है। अब आगे की जांच से स्पष्ट होगा कि इसके तार वास्तव में कितने राज्यों और देशों तक जुड़े हैं।