गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में राजघाट स्थित गुरु गोरक्षनाथ घाट पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब मामला और गंभीर हो गया है। श्मशान घाट परिसर में बने गुंबदनुमा ढांचे का स्लैब गिरने से एक अधिवक्ता की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है। मृतक अधिवक्ता की पत्नी ने हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी ने घटनास्थल की तकनीकी जांच कराने और घाट परिसर में बने अन्य ढांचों की मजबूती की जांच के निर्देश दिए हैं।
अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे अधिवक्ता
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर के राजघाट स्थित गुरु गोरक्षनाथ घाट पर रविवार को अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे दो अधिवक्ता हादसे का शिकार हो गए। दोनों अधिवक्ता अपने साथी अधिवक्ता के परिवार के अंतिम संस्कार में शामिल होने घाट पहुंचे थे।
इसी दौरान गुंबदनुमा छत का स्लैब अचानक गिर गया। मलबे की चपेट में आने से दोनों अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
इलाज के दौरान अधिवक्ता की मौत
हादसे में घायल अधिवक्ता आलोक अस्थाना को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं दूसरे अधिवक्ता संजय सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है।
अधिवक्ता की मौत की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में साथी वकील अस्पताल पहुंच गए। घटना को लेकर अधिवक्ताओं में आक्रोश भी देखने को मिला।
पत्नी ने दर्ज कराई FIR
मृतक अधिवक्ता की पत्नी ने हादसे के बाद FIR दर्ज कराई है। शिकायत में एंबुलेंस पहुंचने में देरी और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया गया है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो शायद अधिवक्ता की जान बचाई जा सकती थी। प्रशासन ने इस पहलू की भी जांच शुरू कर दी है।
CM योगी ने किया मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए मृतक अधिवक्ता के परिवार को **4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता** देने की घोषणा की है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भी मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
आकाशीय बिजली से हादसे की आशंका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हादसे की वजह आकाशीय बिजली हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, बिजली गिरने के बाद गुंबदनुमा ढांचे का स्लैब कमजोर होकर गिरा। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही होगी।
प्रशासन ने निर्माण की गुणवत्ता और संरचना की मजबूती को लेकर भी जांच शुरू कर दी है।
करोड़ों की लागत से हुआ था घाट का सुंदरीकरण
गुरु गोरक्षनाथ घाट के सुंदरीकरण का काम करोड़ों रुपये की लागत से कराया गया था। घाट परिसर में अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए कई चबूतरे और उनके ऊपर गुंबदनुमा छत बनाई गई थी।
हादसे के बाद अब इन निर्माणों की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन अन्य ढांचों की भी जांच कराने की तैयारी कर रहा है।
जांच के घेरे में एंबुलेंस व्यवस्था
घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर एंबुलेंस सेवा में देरी की जांच भी शुरू कर दी गई है। प्रशासन यह पता लगाएगा कि सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस कितनी देर में पहुंची और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं।
अगर जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अधिवक्ताओं ने उठाए सवाल
हादसे के बाद अधिवक्ताओं ने अस्पताल और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
वहीं प्रशासन ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
हादसे ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल
श्मशान घाट जैसे सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में वहां बने ढांचों की समय-समय पर जांच जरूरी होती है।
गोरखपुर की इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक निर्माणों की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ होगा कि हादसा प्राकृतिक कारणों से हुआ या निर्माण संबंधी किसी लापरवाही के कारण।