डिप्टी सीएम के लेटरहेड पर मांगे गए वीवीआईपी दर्शन, फर्जीवाड़े की आशंका

Update: 2026-08-07 09:22 GMT
चित्रकूट : भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में डिप्टी सीएम के नाम से जारी एक कथित वीवीआईपी सिफारिशी पत्र ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया। पत्र में पांच लोगों को चित्रकूट धाम में विशेष वीवीआईपी दर्शन कराने और उनके ठहरने की उच्चस्तरीय व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, अधिकारियों को पत्र की भाषा, तारीख और अन्य तथ्यों पर संदेह हुआ। जब इसकी पुष्टि के लिए स्वास्थ्य विभाग और संबंधित मंत्रालय से संपर्क किया गया तो बताया गया कि ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। इसके बाद पूरे मामले की जांच पुलिस को सौंप दी गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पत्र उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के नाम, फोटो और कथित हस्ताक्षर वाले लेटरहेड पर जारी किया गया था। पत्र में पांच लोगों के नाम दर्ज थे और उनके लिए 7 अगस्त को चित्रकूट में विशेष दर्शन तथा ठहरने की सर्वोत्तम व्यवस्था करने का अनुरोध किया गया था। पत्र प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत अपर जिलाधिकारी (एडीएम) कार्यालय से होते हुए सदर एसडीएम के पास पहुंचा।
बताया गया कि पत्र मिलने के बाद अधिकारियों के पास लगातार फोन कॉल भी आने लगे। कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को उपमुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ा बताते हुए पत्र के अनुसार तत्काल प्रोटोकॉल व्यवस्था सुनिश्चित करने का दबाव बना रहा था। लगातार हो रहे फोन और पत्र की शैली को देखकर अधिकारियों को मामले में गड़बड़ी की आशंका हुई।
सदर एसडीएम अजय यादव के अनुसार, पत्र में आलोक कुमार, साधना देवी, शिवांगी, कुसुम लता और सुधा त्रिपाठी नामक पांच लोगों को 7 अगस्त को चित्रकूट धाम में वीवीआईपी दर्शन कराने और उनके ठहरने की सर्वोत्तम व्यवस्था करने का उल्लेख था। पत्र में एक मोबाइल नंबर भी दर्ज था। इसके अलावा दूसरे मोबाइल नंबर से एसडीएम के पास कई बार फोन कर व्यवस्था कराने का आग्रह किया गया। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम आकाश बाजपेयी बताया और स्वयं को उपमुख्यमंत्री कार्यालय का प्रतिनिधि बताया।
पत्र की सत्यता को लेकर संदेह बढ़ने पर मामला जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) तक पहुंचाया गया। इसके बाद सीएमओ डॉ. महेंद्र त्रिपाठी ने स्वास्थ्य मंत्रालय से संपर्क कर पत्र की पुष्टि करने का प्रयास किया। मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनके कार्यालय से ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। इस जवाब के बाद अधिकारियों का संदेह और गहरा गया।
प्राथमिक जांच में अधिकारियों ने यह भी पाया कि पत्र में कई ऐसी विसंगतियां थीं, जो इसे संदिग्ध बनाती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि पत्र पर अंकित जारी करने की तारीख 7 अगस्त थी, जबकि वह पत्र प्रशासन के पास 5 अगस्त को ही पहुंच चुका था। इसके अलावा पत्र की भाषा, प्रारूप और जारी करने की प्रक्रिया भी सामान्य सरकारी पत्राचार से अलग बताई जा रही है।
पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया पत्र नियमानुसार जारी किया गया प्रतीत नहीं होता। उन्होंने बताया कि फोन करने वाला व्यक्ति स्वयं को डिप्टी सीएम कार्यालय का पीआरओ बताकर अधिकारियों पर विशेष व्यवस्था कराने का दबाव बना रहा था। पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर कोतवाली पुलिस को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित पत्र किसने तैयार किया, उसे प्रशासन तक कैसे पहुंचाया गया और फोन करने वाले व्यक्ति की वास्तविक पहचान क्या है। मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, पत्र के स्रोत और संबंधित दस्तावेजों की तकनीकी जांच भी कराई जा रही है। यदि जांच में पत्र फर्जी पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों के दुरुपयोग सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि या सरकारी पदाधिकारी के नाम का दुरुपयोग कर विशेष सुविधाएं प्राप्त करने का प्रयास गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसलिए मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यदि पत्र फर्जी साबित होता है तो शासन को भी इसकी विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल चित्रकूट प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी भी सिफारिशी पत्र के आधार पर विशेष प्रोटोकॉल या वीवीआईपी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
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