मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान की प्रिंसिपल को कैंटीन का बिल पास कराने के बदले रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि प्रिंसिपल ने 3.85 लाख रुपये के बिल को पास करने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान प्रिंसिपल के पास से 1.35 लाख रुपये की रिश्वत राशि बरामद हुई। टीम ने रिश्वत के नोटों पर विशेष केमिकल लगाकर ट्रैप कार्रवाई की थी। जैसे ही आरोपी ने पैसे लिए, एंटी करप्शन टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया।
कैंटीन और मेंटेनेंस बिल के भुगतान का मामला
पूरा मामला मेरठ के परतापुर क्षेत्र स्थित गगोल में बने सहकारी डेयरी प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान से जुड़ा है। यहां वंदना सिंह प्रिंसिपल के पद पर तैनात हैं। संस्थान में रजपुरा निवासी अमित सिवाच ने कैंटीन और मेंटेनेंस का ठेका लिया था।
ठेकेदार का आरोप था कि उसका करीब 3.85 लाख रुपये का बिल लंबे समय से पास नहीं किया जा रहा था। भुगतान के लिए जब उसने संस्थान के अधिकारियों से संपर्क किया तो उसे प्रिंसिपल से मिलने के लिए कहा गया। इसके बाद बिल पास कराने के बदले रिश्वत की मांग की गई।
1.50 लाख मांगे, 1.35 लाख में हुआ सौदा
शिकायतकर्ता के अनुसार, बिल पास कराने के लिए पहले 1.50 लाख रुपये की मांग की गई थी। बातचीत के बाद रिश्वत की रकम 1.35 लाख रुपये तय हुई। इसके बाद बिल की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और भुगतान भी कर दिया गया।
लेकिन ठेकेदार ने इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन टीम से कर दी। शिकायत की पुष्टि के बाद टीम ने पूरी योजना तैयार की और रिश्वत लेते हुए आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप लगाया।
कार्यालय में ही पकड़ी गईं प्रिंसिपल
एंटी करप्शन टीम ने शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम देकर प्रिंसिपल के कार्यालय भेजा। जैसे ही प्रिंसिपल ने पैसे लेकर अपनी टेबल की दराज में रखे, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। टीम ने रिश्वत की रकम बरामद कर आरोपी प्रिंसिपल को हिरासत में ले लिया।
अकाउंटेंट पर भी उठे सवाल
इस मामले में संस्थान के अकाउंटेंट मुकेश की भूमिका भी जांच के घेरे में है। बताया जा रहा है कि बिल को लेकर ठेकेदार को अकाउंटेंट की ओर से भी परेशान किया जा रहा था और उसी के जरिए प्रिंसिपल तक पहुंचने की बात कही गई थी।
कार्रवाई के दौरान अकाउंटेंट मौके से निकल गया। अब जांच टीम उसकी भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में एंटी करप्शन टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी की शिकायतों पर ट्रैप ऑपरेशन चलाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को पकड़ा जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी काम के बदले अवैध पैसे मांगने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आम लोगों से भी अपील की जाती है कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग या एंटी करप्शन टीम से करें।
जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल आरोपी प्रिंसिपल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एंटी करप्शन टीम मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य सबूतों की जांच कर रही है।
जांच में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
कैंटीन बिल पास कराने के नाम पर हुई इस रिश्वतखोरी की घटना ने सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से साफ है कि रिश्वतखोरी के मामलों में अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।