UP : परिषदीय स्कूलों में अब ब्रज, अवधी, बुंदेली

Update: 2025-03-27 05:23 GMT

यूपी | उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अब छात्रों को ब्रज, अवधी, बुंदेली और भोजपुरी जैसी स्थानीय भाषाओं की शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक पर्व-त्योहारों और व्यंजनों की जानकारी भी पाठ्यक्रम में जोड़ी जाएगी। राज्य सरकार ने यह कदम छात्रों को अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया है।

लोकल भाषा और संस्कृति से जुड़ेंगे छात्र

प्रदेश सरकार का मानना है कि स्थानीय भाषाएं और परंपराएं बच्चों की पहचान का अहम हिस्सा हैं। नई शिक्षा नीति (NEP-2020) में भी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। इसी के तहत यूपी के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में ब्रज, अवधी, बुंदेली और भोजपुरी भाषाओं को शामिल किया गया है

नई व्यवस्था के अंतर्गत:

  • बच्चों को स्थानीय बोलियों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा

  • भाषा के साथ लोकगीत, लोककथाएं और लोक नृत्य भी सिखाए जाएंगे

  • होली, दीपावली, छठ, तीज, कजरी तीज, भैयादूज जैसे त्योहारों का महत्व समझाया जाएगा।

  • यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन जैसे कि पुए, ठंडाई, बाटी-चोखा, लिट्टी, गुड़-चावल, खोया पेड़ा आदि के बारे में बताया जाएगा।

शिक्षा विभाग ने शुरू की योजना

योजना के क्रियान्वयन के लिए शिक्षा विभाग ने प्राथमिक स्कूलों में नए पाठ्यक्रम को शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे बच्चों को अपनी क्षेत्रीय भाषा में पढ़ा सकें।

सरकार का क्या कहना है?

राज्य शिक्षा मंत्री का कहना है कि इस नई व्यवस्था से बच्चों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही, स्थानीय भाषा में शिक्षा मिलने से छात्रों के सीखने की क्षमता भी बढ़ेगी

अभिभावकों और शिक्षकों की राय

  • अभिभावकों का कहना है कि यह पहल बच्चों को अपनी परंपराओं से जोड़ने में मदद करेगी।

  • शिक्षकों का मानना है कि इससे छात्रों में अपनी मातृभाषा को लेकर गर्व की भावना बढ़ेगी।

  • ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इस फैसले से खुश हैं, क्योंकि इससे उनके बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलेगा।

निष्कर्ष

यूपी सरकार की यह पहल न केवल छात्रों को उनकी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में मदद करेगी, बल्कि स्थानीय भाषाओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो भविष्य में यूपी के परिषदीय स्कूलों के छात्र अपनी मातृभाषा, परंपराओं और लोक संस्कृति को आत्मसात करने में सक्षम होंगे


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