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यूपी | उत्तर प्रदेश में करणी सेना का उग्र प्रदर्शन प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। सोशल मीडिया पर एक दिन पहले ही हमले का एलान कर दिया गया था, लेकिन पुलिस फिर भी सतर्क नहीं हुई। इसके बाद सैकड़ों करणी सेना कार्यकर्ताओं ने सपा सांसद के घर पर हमला बोल दिया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई।
कैसे भड़का विवाद?
मामला राणा सांगा पर विवादित बयान से जुड़ा है। करणी सेना ने सोशल मीडिया पर सांसद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
हमले के दौरान क्या हुआ?
करणी सेना के कार्यकर्ता बुलडोजर और हथियारों के साथ पहुंचे।
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सांसद के घर के बाहर नारेबाजी और तोड़फोड़ की गई।
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पत्थरबाजी के कारण कई गाड़ियों के शीशे टूट गए।
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हमले के समय परिवार के सदस्य घर में मौजूद थे, महिलाएं और बच्चे दहशत में आ गए।
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पुलिस के देर से पहुंचने पर उपद्रवियों ने भगदड़ मचाई।
प्रशासन की बड़ी चूक?
करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर पहले ही हमले का संकेत दे दिया था, लेकिन प्रशासन ने कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया।
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ना तो सांसद के घर पर पुलिस सुरक्षा दी गई
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ना ही प्रदर्शन को रोकने के लिए पहले से बैरिकेडिंग की गई
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हमले के बाद ही पुलिस हरकत में आई
करणी सेना की मांग क्या है?
करणी सेना ने साफ कहा है कि राणा सांगा के सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा। संगठन के नेताओं ने सांसद से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
अब क्या हो रहा है?
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इलाके में तनाव बना हुआ है।
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पुलिस ने कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया है।
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प्रशासन अब घटना की जांच में जुट गया है।
निष्कर्ष
करणी सेना के इस उपद्रव ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि जब सोशल मीडिया पर पहले ही हिंसा की चेतावनी दी गई थी, तो पुलिस अलर्ट क्यों नहीं हुई? अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोके और दोषियों पर कार्रवाई करे।





