तुलसीपीठाधीश्वर रामभद्राचार्य ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने की घटना पर जताई नाराजगी

Update: 2025-12-07 17:17 GMT
Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखे जाने की घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत बड़ी और चिंताजनक है और इसका असर भारतीय समाज पर गहरा पड़ेगा। रामभद्राचार्य ने संवाददाताओं से कहा, "यह बहुत बड़ी बात है और बहुत बुरा है। उनकी मंशा पूरी नहीं हो पाएगी। भारत की सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ यह कदम दुर्भाग्यपूर्ण है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो खुद को हिंदू बताती हैं, वास्तव में भारत-विरोधिनी मानसिकता की प्रतीक हैं।
तुलसीपीठाधीश्वर ने कहा कि बाबरी मस्जिद का मुद्दा भारतीय इतिहास और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इतिहास को बदलना या धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। "हमारा समाज संतुलन और सहिष्णुता पर आधारित है, लेकिन ऐसे कदम लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं," उन्होंने कहा। रामभद्राचार्य ने पश्चिम बंगाल सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि राज्य प्रशासन को चाहिए कि वह सभी धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम सामाजिक तनाव और धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देंगे।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि हिंदू समाज और धार्मिक गुरु हमेशा देशभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सजग रहे हैं। "हमारा उद्देश्य समाज में शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखना है। ऐसे कदम इन मूल्यों के खिलाफ हैं और इसलिए इनका विरोध करना आवश्यक है," उन्होंने जोड़ा। रामभद्राचार्य ने मीडिया से अपील की कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करें और सरकार और जनता दोनों को इसके प्रभाव के प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना हर नागरिक और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इस मौके पर तुलसीपीठाधीश्वर ने कहा कि उनका मानना है कि धार्मिक स्थलों के मुद्दों को राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करना देश की एकता और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि देश के सभी नागरिकों को इतिहास और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए और किसी भी विवादास्पद कदम से बचना चाहिए। रामभद्राचार्य के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। उनके समर्थक इसे सुरक्षा और सांस्कृतिक चेतावनी मान रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है।
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