60 कारतूसों के खेल में फंसी खाकी दारोगा समेत तीन पुलिसकर्मी सस्पेंड
कारतूस कांड में बड़ा खुलासा
बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं में 60 कारतूसों की बरामदगी से जुड़े मामले की विवेचना में गंभीर गड़बड़ी सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि मामले के दो प्रमुख आरोपियों के नाम चार्जशीट से हटा दिए गए। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो एसएसपी अंकिता शर्मा ने विवेचक उपनिरीक्षक बाबू खां और सीओ पेशी में तैनात दो सिपाहियों हरीश व प्रवीण को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। तीनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
60 कारतूस के साथ पकड़ा गया था युवक
पूरा मामला दो अगस्त का है। शहर कोतवाली पुलिस ने सिविल लाइंस क्षेत्र के नादे गौटिया निवासी नावेद को गिरफ्तार किया था। पुलिस को उसके पास से 315 बोर के 60 कारतूस मिले थे। पूछताछ के दौरान नावेद ने पुलिस को बताया था कि गांव में गैंगवार की स्थिति चल रही है और वह अपने पक्ष के लोगों को कारतूस देने जा रहा था। पूछताछ में नावेद ने अपने चचेरे भाई ताज मोहम्मद और दोस्त अरबाज का नाम भी लिया था। उसने कथित तौर पर पुलिस को बताया था कि कारतूस इन्हीं दोनों से मिले थे। इसके बाद पुलिस ने तीनों को आरोपी बनाते हुए आयुध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
चार्जशीट से गायब हो गए दो नाम
मामले की विवेचना उपनिरीक्षक बाबू खां को सौंपी गई थी। इसी दौरान कांवड़ यात्रा शुरू होने के कारण पुलिस अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में व्यस्त हो गए। आरोप है कि इसी बीच विवेचक ने फरार चल रहे ताज मोहम्मद और अरबाज के नाम चार्जशीट से हटा दिए और चार्जशीट तैयार कर दी। जब चार्जशीट सीओ पेशी में तैनात सिपाहियों हरीश और प्रवीण के माध्यम से सीओ सिटी के पास पहुंची तो दो प्रमुख आरोपियों के नाम गायब देखकर मामला पकड़ में आया। इसके बाद विवेचना और चार्जशीट तैयार किए जाने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।
ऐसे खुला पूरा मामला
सीओ सिटी ने चार्जशीट में आरोपियों के नाम नहीं मिलने पर पूछताछ शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर विवेचक के साथ सीओ पेशी में तैनात दोनों सिपाहियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई। तत्कालीन सीओ सिटी राहुल पांडेय की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई। रिपोर्ट मिलने के बाद एसएसपी अंकिता शर्मा ने उपनिरीक्षक बाबू खां और सिपाही हरीश तथा प्रवीण को निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। मामले की दोबारा विवेचना भी कराई जा रही है, जिससे यह स्पष्ट किया जा सके कि चार्जशीट से दोनों आरोपियों के नाम किन परिस्थितियों में हटाए गए।
इंस्पेक्टर भी किए गए थे लाइन हाजिर
इस प्रकरण के बीच शहर कोतवाली के इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को भी दो दिन पहले लाइन हाजिर किया गया था। हालांकि एसएसपी की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई का कारण शाहजहांपुर के एक पुराने मामले में बैड एंट्री बताया गया था। पुलिस महकमे में उनकी कार्रवाई को कारतूस मामले से भी जोड़कर चर्चा की जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विभागीय जांच में सामने आएगी पूरी सच्चाई
60 कारतूसों की बरामदगी अपने आप में गंभीर मामला था, क्योंकि शुरुआती पूछताछ में गांव में चल रहे कथित गैंगवार और कारतूसों की सप्लाई की बात सामने आई थी। ऐसे में जांच के दौरान दो नामजद आरोपियों का चार्जशीट से नाम हटना अधिकारियों के लिए गंभीर सवाल बन गया। अब विभागीय जांच में यह पता लगाया जाएगा कि विवेचना में गड़बड़ी क्यों और कैसे हुई तथा इसमें किसकी क्या भूमिका थी। निलंबन को दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जाता; संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी विभागीय जांच और आगे की प्रक्रिया में तय होगी। फिलहाल एक दारोगा और दो सिपाहियों के निलंबन ने बदायूं पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है।