गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में नाग पंचमी के दिन एक दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां मातम में बदल दीं। पोखरे में नहाने के दौरान तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। बच्चों के डूबने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन जब तक बच्चों को पानी से बाहर निकाला गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
नाग पंचमी के त्योहार के बीच हुए इस हादसे की खबर आसपास के क्षेत्र में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी जुटाई। पुलिस हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच कर रही है।
नहाने के लिए पोखरे में उतरे थे बच्चे
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक तीनों बच्चे पोखरे में नहाने के लिए उतरे थे। नहाते-नहाते वे गहरे पानी की तरफ चले गए। पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगने के कारण बच्चे खुद को संभाल नहीं पाए और डूबने लगे।
बताया जा रहा है कि बच्चों को डूबते देखकर आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया। इसके बाद स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े और बच्चों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के परिवार के सदस्य भी मौके पर पहुंच गए।
तीनों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
त्योहार की खुशियां मातम में बदलीं
नाग पंचमी के मौके पर गांव में सुबह से उत्सव जैसा माहौल था, लेकिन तीन बच्चों की मौत की खबर मिलते ही पूरा माहौल गमगीन हो गया। जिन घरों में त्योहार की तैयारियां चल रही थीं, वहां चीख-पुकार मच गई।
मृत बच्चों के परिजनों को संभालना मुश्किल हो गया। ग्रामीण भी हादसे से स्तब्ध हैं। एक साथ तीन बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के गांवों के लोग भी पीड़ित परिवारों के घर पहुंचने लगे।
पुलिस ने शुरू की जांच
सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों और घटना के समय आसपास मौजूद लोगों से जानकारी ली। हादसे के घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस की जांच के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि बच्चे पोखरे तक कैसे पहुंचे और डूबने के समय उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद था या नहीं।
मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी घटना की जानकारी ली गई है।
गहरे पानी का अंदाजा नहीं लगना बना खतरा
बारिश के मौसम में पोखरों और तालाबों का जलस्तर सामान्य दिनों के मुकाबले काफी बढ़ जाता है। कई स्थानों पर किनारे से कुछ दूरी पर ही अचानक पानी गहरा हो जाता है। ऐसे में तैरना नहीं जानने वाले बच्चों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
पानी के अंदर कीचड़, गड्ढे और जलीय पौधे भी दिखाई नहीं देते। इनमें पैर फंसने की स्थिति में तैरना जानने वाला व्यक्ति भी मुश्किल में पड़ सकता है।
मानसून के दौरान बच्चों के अकेले तालाब, पोखरे, नहर या नदी में नहाने जाने से रोकना बेहद जरूरी है।
बच्चों को जलस्रोतों से दूर रखने की जरूरत
इस तरह के हादसों को रोकने के लिए अभिभावकों और स्थानीय लोगों की सतर्कता महत्वपूर्ण है। गहरे तालाब और पोखरों के पास चेतावनी बोर्ड तथा जरूरत के मुताबिक बैरिकेडिंग की व्यवस्था भी हादसों के खतरे को कम कर सकती है।
बच्चों को पानी की गहराई का अंदाजा अक्सर नहीं होता। इसलिए उन्हें बिना किसी जिम्मेदार वयस्क की निगरानी के जलस्रोत में उतरने नहीं देना चाहिए।
गांव में पसरा मातम
तीन बच्चों की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। हादसे के बाद त्योहार की खुशियां पलभर में गम में बदल गईं। परिवार के सदस्यों के साथ ग्रामीण भी इस घटना से सदमे में हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई में जुटी है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में तालाब और पोखरों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।
Tags: